मेरी प्रकाशित रचनाएँ

हिंदी साहित्य पढ़ने लिखने के जनून ने ब्लॉग की दुनिया तक मुझे पहुंचाया ,घूमने ने घुमकड़ी लिखनी सिखाई ,खाना बनाने के शौक ने फ़ूड रिव्यु अॉर रेस्पी लिखना सीखा दिया। जो ज़िंदगी ने दिया   वही कलम से लिखा गया अॉर इसने मुझे बहुत कुछ दिया। एक सकून। दोस्त, अादी.

लेखन  से  मिले सम्मान :
2007 तरकश स्वर्ण कलम विजेता
२००९ में वर्ष की सर्व श्रेष्ठ ब्लागर एसोसेशन अवार्ड
२०११ में हिंद युग्म शमशेर अहमद खान बाल साहित्यकार सम्मान
२०१२ में तस्लीम परिकल्पना सम्मान चर्चित महिला ब्लागर
कुल जमा खाता मेरे साथ चलने वाले दोस्तों का
फेसबुक पर:  4500 साथ चलने वाले दोस्त
Monthly views: 5000
Blog subscribers : 1500
Twitter followers : 1200
देश विदेश से अाने वाले लोग इंडिया ,यु एस ऐ ,कनाडा ,एशिया ,नेपाल सिंगापुर
अब तक टोटल विजिट : 48,800 Visits
अभी तक मेरी प्रकाशित रचनाएँ
 दो निजी  काव्यसंग्रह प्रथम काव्य संग्रह “साया” (सन २००८ )में  (अयन प्रकशन )प्रकाशित
दूसरा  काव्य संग्रह  “कुछ मेरी कलम से (२०१३ ) ( हिन्द युग्म प्रकाशन )यह आप इन्फिबेम से ले सकते हैं 
साझे काव्य संग्रह,
१)पगडण्डीयाँ (इसका  संपादन भी किया )
२)पुष्प पांखुरी (काव्य संग्रह )
३)स्त्री हो कर सवाल करती है ,(काव्य संग्रह )बोद्धि प्रकाशन
४)बालार्क  (काव्य संग्रह )
५)गुलमोहर (काव्य संग्रह )
६)तुहिन गूंज (काव्य संग्रह )
७)अपनी अपनी धरती (काव्य संग्रह ) मांडवी प्रकाशन
८)नारी विमर्श (,काव्य संग्रह)
९)गुलमोहर ( हिन्द युग्म प्रकाशन ) १० )सिर्फ तुम (आगमन से )
११)  लघु कथा साँझा संग्रह (वनिका पब्लिकेशन्स) आदि हैं ……

जल्द आने वाला

अमृता प्रीतम पर आने वाला संग्रह आधी नज्म और पूरा गीत


दैनिक जागरण ,अमर उजाला ,नवभारत टाइम्स ऑनलाइन भाटिया प्रकाश मासिक पत्रिका, हरी भूमि ,जन्संदेश लखनऊ   आदि में लेख कविताओं का प्रकाशन ,हिंदी मिडिया ऑनलाइन ब्लॉग समीक्षा, ट्रेवेल बुक्स और हिंदी साहित्य की हर विधा पर समीक्षा लिखी है ,अब तक लगभग ५० बुक्स की समीक्षा कर चुकी हूँलेखन –कविता,  नारी ,अमृता प्रीतम के ऊपर विशेष रूप से शुरू किया ब्लॉग अमृता प्रीतम की याद में बहुत लोकप्रिय है। समाज  विषयक लेखन के साथ बाल साहित्य लिखने में विशेष रूचि वह नियिमत रूप से लेखन जारी है इन्टरनेट के माध्यम से हिंदी से लोगों को जोड़ने तथा हिंदी में लिखने के लिए प्रोत्सहित करने में विशेष रूचि।
 फिलहाल कई ब्लॉग पर नियमित लेखन अपना ब्लॉग कुछ मेरी कलम से का हिंदी ब्लॉग जगत में नाम है।  इस ब्लॉग को अहमदाबाद टाइम्स और इकनोमिक टाइम्स ने विशेष रूप से कवर किया है|” दीदी की पाती “बाल उद्यान में बहुत पसंद किया गया  .   और जन्संदेश लखनऊ में यह नियमित रूप से पब्लिश होता रहा है |  इ पत्रिका साहित्य कुञ्ज पर लेखन और वर्ड पोएटिक सोसायटी की सदस्य।  कुछ समय पहले अपनी “ज़िंदगीनामा वेबसाइट “ज़िंदगी के फलसफे को बताती बहुत लोकप्रिय हो रही है। नयी दुनिया इंदौर  से प्रकाशित में अमृता प्रीतम में लेख ,कविता आदि प्रकाशित हो रही है।  लिखने के अलावा कुकिंग का भी शौक है ,नयी नयी रेस्पी ,नयी दुनिया और हरी भूमि में पब्लिश हो रहे हैं।
           
 कुछ दोस्तों का कहा मेरे लेखन के बारे में पाठकों का कहा 
Hiii Ranju ji..
kaisi hain ?
mujhe to aapko tab se hi padhna achha lagta tha jab main likhna seekh rahi thi.. hamesha aapki rachnayo’n se prabhavit hoti rahi hoon.. aapko maloom hi nahin hoga main 5 saal se aapki bahut badi fan hoon.aur tab socha karti thi ki kya kabhi aapse mulaqaat ho paayegi, kya kabhi aapse baat kar payungi, aur dekhiye jahan chaah wahan raah mil hi gayi mujhe..:)
. aap kamaal likhti hain.
नीलू नीलम
किसी पुस्तक के बारे में इतने ढंग से बता पाना कोई बड़ा कवि/कवियत्री ही ऐसा कर सकता है… जैसा मुझे लगता है…
पुरे पुस्तक के हर पंक्ति पर इतने ध्यान से पढ़ कर फिर समीक्षा में उसे पंक्तिबढ करना कोई आपसे सीखे
बहुत बेहतरीन पुस्तक की बेहतरीन समीक्षा….\मुकेश कुमार सिन्हा

वन्दना said…हरकीरात जी को पढना तो हमेशा ही भाता है और उस पर आपकी समीक्षा ने कमाल कर दिया। आप दोनो को बधाई।

शैलेश भारतवासी said…एक प्रवाह में पढ़ी जा सकने वाली समीक्षा

हरकीरत ‘ हीर’ said…यदि विवाह उपरांत आपसी सहमति से प्रेम संबंध बनते हैं तो गलत नहीं है, क्योंकि हर किसी को अपनी पसंद-नापसंद का अधिकार होना ही चाहिए न कि किसी के थोपे हुये संबंध के निर्वहन मे पूरी ज़िंदगी को नीरसता मे धकेल दिया जाया । हो सकता है मेरे विचारों से आप इत्तेफाक न रखें मगर यही सच है और इस सच को गाहे-बगाहे स्वीकार करना ही होगा समाज को, नहीं तो एक पुरुष प्रधान समाज मे स्त्री की मार्मिक अंतर्वेदना के आख्यान का सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा, ऐसा मेरा मानना है

बहुत अच्छी समीक्षा की रंजना जी आपने …और विचार भी …
अब आप समीक्षा में सिद्धहस्त हो गईं हैं ….:))
बधाई रविन्द्र जी और रंजना जी ….!!

बहुत सुंदर समीक्षा की है रंजू जी पुस्तक पढ़ना चाहूँगी आपको और रवीन्द्र प्रभात जी दोनो को बधाई

Udan Tashtari said…जल्दी ही पढ़ते हैं…इस समीक्षा को पढ़कर रुकना जरा मुश्किल है…ऑनलाईन ही खरीद लेते हैं….

PRAN SHARMA said…ACHCHHEE SMEEKSHA KE LIYE BADHAAEE.

रश्मि प्रभा… said…श्रेष्ठ कलम की स्याही की समीक्षात्मक मुहर है…

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...समीक्षा पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है … बहुत सुंदर

 

बाकी आप सब मेरे लेखन के बारे में यहाँ पढ़ सकते हैं

http://ranjanabhatia.blogspot.in/

आप मेरे से किसी भी लेखन के बारे में कोई भी संपर्क करना चाहते है  कुछ लिखवाना चाह्ते हैं तो  मेरे इस इ मेल पर मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं.* समीक्षा ,या और किसी भी विषय पर लिखने के “charges”आपके बताये काम  को  बढ़िया  ही साबित करेंगे /