window no 16 under section 214 b (Trump ka USA)

अरे !! शीर्षक पढ़ कर चोंकिये मत बहुत ही दिल के करीब का किस्सा सुनाया जा रहा है सीधे इस खिड़की से । क्या कभी आपने सपने को जो कभी देखा ही नहीं,पर उसको आँखों के आंगन में उतरते और फिर उसके पँखो पर सवार खुद को देखा है ?मैंने  देखा है ,जो अक्सर विदेश यात्रा पर रहते हैं वह इस सेक्शन से परिचय रखते होंगे ।

तो जी यह किस्सा है उस यात्रा का जिस पर हम एक महीना बिना वीजा के खूब घूमे ।आज से ठीक एक महीना पहले एक मेल आया हमको कि आपको न्योता भेजा जा रहा है ,यहाँ आस्टिन “यु एस ऐ “में पोएट्री फेस्टिवल में आपका नाम इंडिया से 20 लोगों में से चुना गया है ,तो दिमाग की घँटी बजी और इसी घँटी में अपनी प्रिय सखी शुभ की भी मेल जो इस सफर की मुख्य कर्ता धर्ता बनी जिसने हमारा नाम इस सोसाइटी को भेजा था , कहा मुझे कि नाम ही मै दे रही हूँ, पर आगे चुने जाने का काम तुम्हारा “बायोडाटा “करेगा । सो दोनों ने यानि नेरी प्यारी सखी और मेरे लेखनी के क्षेत्र के कर्मों ने अपना अपना काम किया जिस से यह यात्रा का योग बना ,पर  मेल जब देखी तो पाया उसमे टिकट ही नही है अब उनसे तकाजा किया कि जब बुलाया  है   तो जरा इज्जत से बुलाओ न्योता तुम्हारा, टिकट हमारी न चलेगी ,उनकी भी समझ में यह इज्जत वाली बात आ गयी और इसके साथ ही टिकट भी आ गयी ।अब इस यात्रा को कौन रोकेगा सोच कर मेरा घुम्मकड़ दिल रोज़ वहां जाने के सपने देखने मै जुट गया ।दिल से आभारी हूँ अपनी सखी शुभ की जिसकी वजह से जिसकी चाहना से मेरे लिए यह सच होने जा रहा था ।

    ,वीजा फॉर्म भरने की “लेफ्ट राइट “शुरू हुई ,अब जाना कि वीजा के भी नंबर होते है “बी1 बी2 पी3 “आदि आदि ,खोज खबर निकाली गयी तो टूरिस्ट  वीजा के अंदर जाना तय हुआ ,पर हमेशा की तरह “थोड़ी ख़ुशी थोड़े गम “की तर्ज़ पर  हमारे शरीर ने भी बताया कि वो अभी आराम करने के मूड में है ,”किडनी जी “हड़ताल पर जाने की धमकी देने लगी ,जान कर लगा यह क्या पंगा है ईश्वर!!   अब  प्रभु अब इस  रोग के साथ कैसे यात्रा होगी कुछ करो ,सो बीजा के साथ साथ इसको भी स्वस्थ सेवा देने की जुगाड़ लगायी ।अजब सी जुगलबंदी रही इस फॉर्म भरने और किडनी स्वस्थ के बीच ,फॉर्म को भरने का जिम्मा  छोटी बेटी दामाद ने संभाला तो किडनी दुरुस्त करने  का काम छोटी बहन ने डॉ बता कर निकाला । यह खुशखबर परिवार दोस्तों  में भी बतायी गयी कौन सुन के खुश हुआ कौन हैरान परेशान  यह समझ बाद में आया। धीरे धीरे स्वस्थ भी रस्ते पर आया और फ़ॉर्म प्रकिया भी ।”ग्यारह हजार दो सौ” का चढ़ावा फीस के रूप में अर्पित किया गया  ।,अपॉइंमेन्ट की डेट मिली इंटरव्यू के साथ ,और एक मेल फेस्टिवल वालों का भी मिला कि अपनी कविता इंग्लिश में भेजो ।अब जब सेलेक्ट किया था मुझे  तो हिंदी पढ़ कर अब बोल रहे इंग्लिश में सुनाओ और इंग्लिश अपनी” निल बट्टे सन्नाटा “और हालात” इंग्लिश विंग्लिश की श्रीदेवी सी” हो गयी ।
नाम तलाशे मित्रो के जो इंग्लिश में बदल दे मेरी कविता को कई मित्र सुझाये गये नामों की साथ और उनकी मदद भी आई पर मेरी कविता इस इंग्लिश परिधान में खुद को असहज महसूस कर रही थी ,फिर मेरी समझदार  छोटी बेटी ने उसको सही ढंग से सजाया संवारा और उसको मेल से मैंने रवाना किया ।बाकी को बदलने का कार्य एक अमेरिका में ही रहने वाली मित्र को भेजा जो बहुत बेहतरीन तरीके से मेरे पास सज कर आया।
  इसी बीच आइपोइन्मेंट की डेट आयी । मुझसे ज्यादा बिटिया नर्वस लगी मुझे । वक़्त की बात होती है न सब कभी हम बच्चो को सिखाते हैं सब ,और बढती उम्र के साथ बच्चे हमें सिखाते हैं ,अच्छा लगता है  ।
मै कुछ निश्चित थी कि मै कौन सा वहां बम फोड़ने जा रही हूँ ,”कविता “ही तो सुनाने जा रही हूँ और फिर वहां जब ठेठ जट पंजाबी दिखे तो विश्वास सातवें आसमान पर पहुंच गया। यहाँ कुछ मेरे नाम का पंगा था रंजना एक पेपर में बाकी में रंजू पर वह भी आराम से सुधर गया  ।कुछ विशेष परेशानी नही हुई । 10 मिनट में सब प्रकिया पूरी हुई तो लगा आधी जंग जीत ली ।
     इसी बीच सबसे सुन कर कि लन्दन  एयरपोर्ट पर चलना खूब होगा तो “वफादार  जूते”नये खरीद कर पार्क में सैर करते हुए खुद को एयरपोर्ट पर घूमते हुए देखने  का अभ्यास शुरू किया। इंग्लिश मन ही मन बोलने की प्रेक्टिस शुरू की ,यानी की हर पल खुद को सैर करते हुए कभी अमेरिका ,कभी लन्दन और कभी कविता सुनाते हुए कल्पना में टांगो को चलने के लायक बनाने की कोशिश की 🙂 बहन की रोज़ एक सलाह आती दीदी शर्म न करना खाना यहाँ से साथ ले जाना तो कल्पना में परांठे अचार की खुशबु  से पूरे फ्लाईट के बन्दों को मुहं में पानी भरते देखा 🙂 
    अब अगला कदम था इंटरव्यू का ,वह दिन भी आया पहुंच गए अपने सब पेपर ले कर वही मिनी पंजाब बना हुआ । चटक मटक कपडे हर तरफ ,नयी नवेली पंजाबी दुल्हने सजी हुई ,कहीं मिनी ड्रेस में और इन सब के बीच में ,मै सीधे सादे कुर्ते और सादे से चेहरे  के साथ आगे बढ़ी तभी  वहां खड़ी गॉर्ड ने कहा यह कड़ा (बेन्गल) दिखाओ ,मैंने कहा इसमें कुछ इलेक्ट्रॉनिक नही ,उसने दूसरी  गॉर्ड को दिखा कर बोला “सुंदर है न । मै मन ही मन मुस्करायी और मन में  सोचा सब  सही से हो जाने दो ,यहीं  दे जाउंगी तुम्हे  ही। सब प्रक्रिया सहजता से होती गयी ,नर्वस तो पहले भी नहीं थी सब आसानी से देख कर और भी सब आसान लगने लगा।
अंदर सब को तरकीब से काम करते हुए यू एस एम्बसी को देखते हुए ,उस खुदा का शुक्रिया किया की यह सब मैं अपने बलबूते पर होते हुए देख रही हूँ 🙂 फिर वही विंडो ६ से  विंडो 16 पर जाने का निर्देश मिला । वहां खड़े अमरीकन से दिखने वाले बन्दे ने कुल 5 सवाल पूछे और 5 मिंनट में एक पेपर पकड़ा कर अमेरिकन लहजे में  कहा “बहुत अफ़सोस है मुझे ,आप नही जा सकती है ,मुझे दुःख है आपके वीजा रिजेक्ट होता है” मै मुहँ बाएं फाड़े उससे पूछ  रही हूँ कारण , ? वो कह रहा है पेपर पढ़ लो और पेपर में मुझे 214 बी सेक्शन यह कारण बता रहा है …..

1 अपना नाम वही रखो जो माँ बाप ने दिया (हलांकि  यह कारण नही बना पर नचाया तो इसने भी )
2 अधिक उत्साहित हो कर अपनी दिनचर्या मत बदलो ,खाओ पीओ और मस्त रहो ।
3 वीजा के लिए चटक मटक हो कर जाओ ,क्या पता आपका सीधा सादा चेहरा खिड़की के उस पार  को शायद पसंद न आये 😊
4 किसी लेडी गार्ड को आपका हाथ का बेंगल पसंद आ रहा है तो दे दो क्या पता उसकी दुआ से आपका वीजा लग जाए ।
5 भगवान को यह अर्जी मत लगाओ कि बीमारी में कैसी होगी यात्रा ,न जाने उस ऊपर वाले को यह प्रश्न बहुत दुविधा पूर्ण लगे और वह मुस्कराते हुए खिड़की नम्बर १६ के मुहं से कहलवा दे “तेरे मन कुछ और है दाता के मन कुछ और 🙂 
6 आपके पेपर चाहे सब पूरे व ठीक हों पर आप का वीजा रिजेक्ट होने के बाद आप अपनी कल्पना में अपने बोलने ,और एक्स- वाई -जेड किसी को भी ब्लेम कर सकते हैं :)क्यों की यह सेक्शन 241 b है जिसमे कोई भी कारण हो सकता है ,आप बेशक अपने परिवार को यहाँ छोड़ कर जा रहे हैं पर आप वहां बिना घर के भी बस सकते हैं ,वहां छुपन छुपाई का गेम खेल सकते हैं :)उन visa एम्बसी वालों के ख्याल से :)जैसे यहाँ कोई घर बार नहीं है बस सभी दुनिया वहीँ बसती है 
 और परांठे अचार और हिंदी अपनी देश की चीजें है वो यही मान पाती है 😊😊 वो सात समुन्द्र पार वाले क्या जाने कि उन्होंने किस हीरे को आने से अपने देश में रोक लिया है 🙂
 
तो यह थी वो मानसिक यात्रा जो मैंने एक महीने में पूरी की। प्रत्यक्ष जा नहीं पायी ,पर यह गरूर है की २० इंडियन थे इस फेस्टिवल की प्रतियोगिता में ,पर नाम मेरा सेल्केट हुआ । मेरे लिए यही बहुत बड़े सम्मान की बात है ।ट्रम्प जी का आशीर्वाद कहो या मेरा दानापानी कि जाना नहीं हो पाया पर पूरी इस प्रक्रिया से परिचित करवा दिया और इस यात्रा को कुछ सच और कुछ हास्यव्यं में लिखवा दिया ।DEAR Trump KO USKA USA mubarakBeltway-Visa-2-.jpg (2058×2400)चित्र गूगल के सोजन्य से 


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