यात्रा विद नन्हे ट्रैवेलर्स ! Travelling with kids

Alice in Wonderland almost सबने देखा होगा। Alice एक बच्ची जो खेल से बोर हो कर एक नदी के किनारे बैठी है, तभी एक कपड़े पहने खरगोश को भागते हुए देखती है और उत्सुकता से उस खरगोश के पीछे उस के बिल से एक अदभुत दुनिया में पहुंच जाती है और कई रोचक और हैरान कर देने वाली चीजों को देखती है।

उसकी इस दुनिया के साथ उसके साथ हम भी एक अनोखे सफर को तय करते रहते है, मुझे लगता है यह कहानी इंसान की उस फितरत को दर्शाती है जिसमे बच्चे से ले कर बड़े तक travel के उस रोमांच को जी लेना चाहते हैं जो नई जगह पर घूमने जाने से देखी जा सकती है। और आज के वक़्त में मेरे ख्याल से कोई अजूबा इंसान ही ऐसा होगा जो घूमने नयी जगह ट्रेवेल करने के लिए interested नहीं होगा। आदम तो इस सृष्टि के आरम्भ से ही घुमक्कड़ रहा है उसी का फल यह दुनिया की विस्तृत नई नई जगह और उनका रोमांच है।

कुछ में यह घूमने की इच्छा वक़्त के साथ develop होती है, कुछ पैदायशी घुम्मकड़ होते है! यह बात मैंने अपनी 3 साल की नातिन में बहुत अच्छे से देखी, किसी भी तरह का सफर हो वह उस सफर को न केवल enjoy करती है, बलिक उस सफर में आने वाली किसी भी मुश्किल,आसान हालात में बहुत अच्छे से एडजस्ट भी करती है। आमतौर यह समझा जाता है कि छोटे बच्चे के साथ सफर में मुश्किलें होंगी या बच्चे परेशान होंगे, पर यकीन करिये बच्चे जितना अधिक ट्रेवेल करेंगे उतना अधिक सीखेंगे, जानेंगे समझेंगे। वैसे  भी इंसानी दिमाग किताबी ज्ञान से अधिक सामने घटते हुए, होते हुए और प्रत्यक्ष बातों से चीजों को अधिक देर तक याद रखता है और जल्दी से समझता है। travelling with kids benefits
हमारी नन्ही ट्रेवलर Goa गयी तो उसकी समझ में वहां बहुत सारा पानी है, और वहां की बोट बहुत बड़ी है क्योंकि पानी ज्यादा है तो बड़ी बोट चलेंगी,यदि हमारे साथ Pushkar गयी तो उसको समझ आया कैमल यहाँ पर आसानी से चल सकता है और यहाँ बहुत सारा पानी नहीं है हां पर बहुत सारी बर्ड्स है, जिनकी उसने आवाज़ अपने सामने सुनी, उल्लू, मोर, नीलकंठ जैसे पक्षी जो दिल्ली जैसे शहर में देखने भी मुश्किल है उसने वहां देखे और उन्हें बोलते हुए देख कर आवाज़ भी समझी उनकी। किताबी ज्ञान या अपने प्ले स्कूल में वो सीख तो लेती पर उसकी memories में जो यह सब देखा हुआ याद रहेगा वह जीवनभर का होगा।

bacho ke saath travel
ट्रावेल्लिंग से बच्चों को कई नयी चीज़ें समझने को मिलती है

यह बात और है कि कई बातें उसको पसंद नहीं आयी जैसे जब camel ride पर ऊंट जब हमें ले जा है तो उसको “पू पू” नहीं करनी चाहिए, स्मेल आती है, जिसकी वजह से उसको पूरा वक़्त नाक पर हाथ रखना पड़ा, या उल्लू जब रात को जागता है तो उसको दिन में बात नही करनी चाहिए क्योंकि मैंने ही उसको बताया कि उल्लू रात में जागता और आवाज़ करता है!

travelling-with-kidsया  कैमल राइड के वक़्त उसकी उम्र से थोड़े बड़े बच्चे क्यों पीछे पीछे भाग कर मांग रहे थे,जो उसने बोला भी मुझे कि उसको अच्छा नही लगा यह। अब उसकी बालबुद्धि को क्या अच्छा नही लगा इस मांगने में यह वो स्पष्ट नही कर पायी, पर निश्चय रूप से उसने  इन सब बातों से कुछ नया ही देखा। और उसके हर वक़्त के सवाल जवाब ने न मुझे केवल बच्चा बनाया बलिक और भी उस सफर को यादगार बना दिया। भीड़भाड़ इलाके में उसकी patience, उत्सुकता ने मुझे भी इरिटेट होने से रोक लिया, जरूरी नही कि बच्चे की हम ही बड़े होने के नाते कुछ सिखाये समझाए,  इस तरह के सफर बच्चो के साथ हम बड़ों को भी वह बातें सिखा जाते हैं जो हम वक़्त की रफ्तार में भूलने लगते है।😊

अब तो हमारी शिक्षा में भी बदलाव है, शब्दों के परिचय के साथ साथ दृश्य द्वारा भी सिखाया समझाया जा रहा है।स्कूल में अब होने वाले कम्पल्सरी ट्रिप्स भी ट्रेवल को और भी रोचक बना रहे हैं।

दुनिया अब सिमट गयी है ,कोई भी ट्रेवल  इसको और भी छोटा कर रहा है।देश विदेश की संस्कृति, लोगो को समझना भाषा ,खानपान बहुत ही आसानी से बच्चे समझ लेते है।हमारा ट्रेवेल बाज़ार भी इन नन्हे ट्रेवलर की जरूरत को समझ कर मनमोहक सूटकेस, बेग आदि बेच रहे है जिसमे बने कार्टून करेक्टर किसी एक देश एक बच्चे या सिर्फ टीवी स्क्रीन के नहीं बच्चो के साथ साथ ट्रेवेल कर रहे हैं।इसलिए खूब घूमिये और ऊबे साथ इन नन्हे ट्रेवेलरस को भी घुमाइये ,दुनिया एलिस इन वंडरलैंड सी अदभुत रोचक और एल्सा सी जादूभरी है .1884_10153874384477642_809050241906162747_n

 



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