Saykilon ka shahar Barlin (Sangeeta Sethi ) Book review

बर्लिन सपनो में अब तक जाने वाली जगह है न ? बोधि प्रकाशन के साए तले प्रकाशित हुई sangeeta sethi की यह किताब मेरी जर्मनी यात्रा “साइकलों का शहर बर्लिन देखी” और दूसरी किताब “जार्डन यात्रा ,”देखी तो मंगवा ली और अभी यह जर्मनी यात्रा पढ़ कर समाप्त की है ,Sangeeta sethi के Spandan ब्लॉग बहुत पहले एक बार पढ़ा था ,तब इनकी लिखी कविताएं पढ़ी थी और उनकी बेटियों पर लिखी एक कविता के कुछ शब्द जहन में थे ,बहुत ही  बढ़िया कविता थी इनकी यह  “आने दो बेटियों को धरती पर /पनपने दो भ्रूण उनके /वरना कौन धारण करेगा /तुम्हारे बेटों के भ्रूण बस यही याद रह गयी थी उस वक़्त से मुझे ,और आज जब यह किताब पढनी शुरू की और जब यह जाना कि  इनकी पहली विदेश यात्रा बेटी की शानदार उपलब्धि से ही जुडी है तो लगा वाकई क्यों आज भी लोग बेटा, बेटा ही करते हैं ,उनके इस यात्रा विवरण में लिखी शुरूआती पंक्तियाँ बेटी की उपलब्धि के जोश से भरी है “जर्मन जाने के प्रति जितना उत्साह और उत्सुकता थी उसने मुझे जर्मन यात्रा के दौरान दुगुना बन कर मुझे रोमांच से भरपूर सराबोर कर दिया था। पहली विदेश यात्रा….वो भी यूरोप की…..उस पर बेटी सृष्टि के सेमिनार में बुलावा वैसे भी किसी रोमांच से कम नहीं था “वाकई यह रोमांच पहली विदेश यात्रा जाने को और भी जोश से भर देता है ,

यात्रा शुरू से दिल्ली से वहां तक के सफ़र को रोचक बनाने का पूरा प्रयास है ,साथ में छोटे बेटे के खाने पीने की हर ताकीद जैसे छोटे बच्चे के साथ सफ़र को और रोचक बनाती है ,तीन साल के बेटे के साथ होटल ,उसके दूध ,उसका घूमना और साथ साथ नए शहर की मेट्रो ,नयी जगह को देखना हर शब्द के साथ साथ आपको इस सफरनामे में साथ लिए चलता है ,
इस सफ़रनामे में आप लेखिका के लिखे के जितने ही सहज है ,वह बात अब चाहे ,शाकाहारी खाने को ले कर हो ,या मेट्रो ,बस की अपने देश से तुलना हो ,या  यूरोप में एशियन चाहे वह हिन्दुस्तानी हो या पाकिस्तानी वह वहां एक है ,यानी सब सहज है लिखने वाला भी और पढने वाला पाठक भी ,जैसे साइकल देखते ही उत्साह से यह सोचना “होटल के सामने ही ढेर सारी साइकिलें खडी थी और लिखा था  रैण्ट ए बाइक  तो यहाँ साइकिलें भी किराए पर मिलती है । वाह ! मेरा मन बल्लियों उछल पड़ा । यानि मैं अपने होटल से ही साइकिल किराए पर ले सकती थी । मेरे मन में दृश्य देखकर ही विचार बनते जा रहे थे । ख्याल बना कि केवल पर्यटक ही चलाते हैं फन के लिए साइकिल । मेरा मन हुआ कि मैं भी चलाऊँगी साइकिल पर दूसरे ही क्षण विचार आया कि अपने तीन साल के बेटे को कैसे मैनेज करूँगी । उधर दूसरे काम भी होते जा रहे थे—सब कुछ नया था हमारे लिए ..होटल में चेक इन…मैग्नेटिक डोर-की….गोरी चमड़ी और नीली आँखों वाली रिसेपशनिस्ट….”है न सहज?  जैसे इसको पढने वाला वहीं होने का एहसास करता है ,और वहां पहुंच के आने वाली हर बात से परिचित होने की भरपूर कोशिश .
वहां जाते हुए जिस तरह से उन्होंने अपने सूटकेस में कपड़ों का चुनाव किया और वहां पहने है, वह भी मेरे जैसे पढने वाली के लिए एक नारी जिज्ञासा को  जगा देता हैं ,जर्मनी में हिंदी विभाग में साडी पहन के जाने पर वहां की मुख्य से मुलाक़ात का श्रेय भी साडी लेती है ,और साडी पहनने पर देखने वालों की उत्सुकता इस को और रोचक बना देती है ,यह सब पढना वहां खुद को महसूस करने जैसा लगता है /
यहाँ चाहे पाकिस्तान ,हिंद्स्तान हो पर दूसरे देश में सब एक ही है वो है एशियन और भाई बहन जैसे ,और यह इस सफरनामे में शाकाहारी भोजन एक पाकिस्तानी भाई के होटल में खाने पर बहुत ही रोचक ढंग से लिखा गया है इतने दिन तक विदेश पर रहने पर ही अपना भोजन कितना ललचाता है यह वहां जा कर ही जाना जा सकता है .
उनका बुनाई प्रेम और उसके लिए वहां की हस्तशिल्प को ब्यान करना बहुत ही अधिक रोचक लगा .दुनिया वाकई कहीं भी बसे पर स्त्री हर जगह एक सी ही है ,अपने को व्यस्त रखने के लिए कुछ न कुछ बुनती हुई ,फिर वो चाहे जर्मनी के किसी बगीचे का या रोडसाइड का बेंच हो या किसी भारतीय घर के सामने बना हुआ कोई पार्क और बेंच 🙂 स्त्री बुनती है लफ्जों में अपने हर सपने को या धागों में ऊष्मा के स्नेहिल बंधन को बस यही पढ़ते हुए लगा इस सफरनामे के बुनाई लफ़्ज़ों को पढ़ते हुए 🙂
.sangeeta sethi का लिखा यह सफरनामा और रोचक हो सकता था ,यदि इस में फोटो भी होते .और कई जगह लास्ट में जैसे लिखे गए को दोहराया गया नहीं होता ,मुझे सफ़र करना ,घूमना और सफरनामे पढना बहुत ही पसंद है .जब इतने रोचक ढंग से लिखा जा रहा हो पर वहां की पिक्चर न हो तो अधूरा लगता है ,कारण  मेरा ख्याल है कि मुझ जैसे सफरनामे पढने वाले वैसे ही अपनी काल्पिनक दुनिया में रह कर उसको पढ़ते हैं ,और जब वहां की फोटो न हो तो वह बस अधिक देर तक दिलो दिमाग पर दस्तक नहीं देते ,यह मेरा ख्याल है ,बाकी बोद्धि प्रकाशन से पब्लिश यह बर्लिन यात्रा पढने लायक है यदि आप भी मेरी तरह लिखे द्वारा घुमने के शौकीन है .sangeeta sethi को धन्यवाद कि उन्होंने इस यात्रा को शब्दबद्ध किया और मेरे जैसी पढने वाली ने चित्रों के साथ न सही पर शब्दों के साथ इस यात्रा का हर पल जीया 
आप यह रोचक सफरनामा पढना चाहे तो बुक धारा से इस समय चल रहे डिस्काउंट पर मंगवा सकते है 

Saykilon ka shahar Barlin

Author: Sangeeta Sethi

Language: Hindi

Publisher: Bodhi Prakashan

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