Sacred River :Book review

“Sacred River”Poems From India” by  Shubh Bala Schiesser शुभ बाला जी की यह संग्रह  मेरे हाथ में बहुत इंतजार के बाद आया  ,जब से यह रिलीज हुई ,तब से इसका इंतजार था ,सात समुन्द्र पार से यह बहती पवित्र नदी सी अपने सुंदर आवरण के साथ जब मेरे हाथ में पहुंची तो ख़ुशी का ठिकाना न रहा ,आखिर सात  समुन्द्र पार से आने वाले यह शब्द अपनी बात कविता  के रूप में पढ़ कर इनके बारे में  मुझसे कुछ कह्लवाना चाहते थे ,तो उत्सुकता इसको पढने की स्वभाविक थी ,वो कहते हैं न दिल की बात समझने के लिए भाषा कभी भी अवरोध नहीं बनती है ,जब “शुभ” ने अपनी इस शब्दों की बहती नदी की बात की और कहा इंग्लिश में है सभी कवितायें  तो मैंने कहा ,मैं पढ़ जरुर लूंगी पर इस पर लिख कैसे पाऊँगी ,क्यूंकि इंग्लिश भाषा में लिखने की इतनी पकड नहीं मेरी ,सो में हिंदी में ही लिखूंगी कुछ लिखना चाहूंगी तो और जब यह पोयम्स पढ़ी तो कई जगह पढ़ते हुए आँखे नम  हुई ,सरल इंग्लिश भाषा में लिखी गयी यह कविताएं नारी मन के उसी दर्द को ब्यान कर रही थी जो किसी भी भाषा की मोहताज़ नहीं ,सिर्फ अपने लिखे से एहसास करवाती है और सीधे दिल पर दस्तक देती हुई ,नदी सी धारा प्रवाह उतरती जाती है .शुभ की यह पोयम्स फ्रॉम इंडिया का सफ़र आरेंज मेरिज से अपनी बात कहता आपके बचपन के कई यादों को आपको याद दिलवा देगा ,नदी की तरह बहते इस संग्रह में औरत की हर बात का ज़िक्र है ,उस से जुड़े रिश्तों की गहराई ,जैसे पिता ,माता ,दादी ,और यहाँ से मिले इंडियन संस्कार, पतंग उडाना ,आम खाना ,आदि  सात समुन्द्र पार से लिखते हुए भी यही से जुड़े हैं ,कहीं वह जुदा नहीं लगते

     पच्चीस कविताओं की यह निर्मल नदी सही में नदी और नारी की उस गहरे सम्बन्ध को स्पष्ट उजागर कर देती है ,जहाँ प्राचीन  समय से नदी और नारी को हमारे देश की धरती पर पवित्र और सहनशीलता की मिसाल के रूप में जाना जाता है ,भारत में नारी और नदी, का गहरा सम्बन्ध और सम्मान शुरू से ही किया जाता है . पानी ,नदी और नारी तीनों को हमारे ऋषि-मुनियों ने जीवन से जुड़ा माना है| नारी और नदी को माँ का दर्जा दिया गया है, और पानी को  जन्म से ही जोड़कर देखा जाता है| जिस तरह से नदी का जीवन शुरू होता है उसी तरह से नारी का जीवन भी समझा जा सकता है छोटी सी नदी की तरह नारी भी चंचल बालिका सी जन्म लेती है ,किसी छोटी सी नदी की तरह वो सिर्फ अपने युवा होने तक बहती जाती है ,चंचलता और रोमांच से भरी जैसे पूरी दुनिया उसकी मुट्ठी में है  .नदी और नारी एक से ही तो हैं ,जैसे जैसे इनके जीवन आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे नए एहसास ,नए रिश्ते ,नयी चुनौतियां आगे इनको बहाए ले जाती है ,आज भी हमारा समाज बहुत आगे बेटी बचाओ अभियान पर है ,पर बेटी को वो स्नेह  मिलता जो बेटे को दिया जाता है ,पराई समझ के पालन पोषण ही इसकी उस चंचल गति को रोक लेता है ,जैसे नदी जन्म लेती है कहीं दूर पहाड़ों में और पोषण करती दूर कहीं मैदानों का और यही बंधे हुए अवरोध उसकी चपलता उसकी चंचलता को रोकने लगते हैं ,नए रिश्ते ,नए घर के बंधन फिर भी वो हर सहनशीलता से उस को पार करती है ,नदी पर  बने बाँध की तरह उसका जीवन भी बांधने की  कोशिश रहती है ,जिस प्रेम के नाज़ुक बंधन को मीठा  अमृत सा बनना चाहिए, उसे ही सामाजिक कानूनों और पैसों में तौल कर जबरदस्ती का बंधनबना दिया जाता है , “forced marriage “शुभ की लिखी सबसे सच्ची कविता लगी मुझे इनके  इस संग्रह में ,नदी की तरह नारी को समुद्र रूपी पुरुष  में विलीन होना ही है, परंतु ये एक मजबूरी हो,ज़बरदस्ती थोपा गया बंधन न  हो
Soon she will be the property
Of a stranger—a master who will buy her
Like a sheep, goat or cowFrom a village stockyard
With a nose ring and brass bells
Ringing on her neck.
Headaches and body-aches
Will be taken as excuses to shirk work.
She will stuff her sari in her mouth
To suppress cries.She will age before getting old,
Die before death.
परंतु ऐसा नहीं कि विवाह हमेशा एक बंधन ही हो। हर जगह कुछ न कुछ अच्छा होना भी सम्भव है और नदी का और नारी का लगभग एक सा जीवन होने के कारण इसकी सम्भवना भी बहुत है ,बस नदी का समुद्र से मिलना एक “खारा”   समझौता न हो बलिक एक “खरा “मधुर एहसास हो जहाँ एक दूसरे को समझने की कोशिश हो ,इसी पर पूरी ज़िन्दगी की बात समझी जा सकती है. नदी की तरह नारी भी सृजन करती है नए जीवन का और फिर उसकी चंचलता ममता में बदल जाती है ,अपने अस्तित्व से वह हर नए रिश्ते को खूबसूरती से सजाती है पर कई बार उसको वह सम्मान नहीं मिलता  अधिकारिणी है ; अक्सर पुरूष प्रधान समाज से प्रेरित हो वो उसकी रूढ़िवादी परंपराओं को ही जीवन का सच मान बैठती हैं। बहू को कम दहेज लाने और लड़की होने पर ताने देना भी एक स्त्री ही लगाती है ,बेटी होने पर उसकी साँसों को रोक देने का फैसला  न जाने कैसे कर पाती है, विधवाओं को बेरंग जीवन जीने के लिए मजबूर करना में  बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने लगती है हम लोग स्त्री होने पर भी ,स्त्री का दर्द नहीं समझ पाती है
शुभ जी की सभी कविताएं इसी तरह के सभी संदर्भो को ले कर लिखी गयी है , उनकी लिखी कविताओं की कुछ पंक्तियाँ मेरे लिखे इन सब बातो को समझा पाएगी ,उनकी सभी कविताओं का सार मैंने यहाँ लिखा है ,अब जो उनकी कविताओं की लहरों ने शब्दों के रूप में मुझे छुआ वह यह है ,पर यह  सिर्फ चंद पंक्तियाँ होंगी ,पूरी पोयम्स को पढ़ने के लिए  आपको इस संग्रह को पढ़ना  ही होगा
उनकी पहली कविता “Hindu women की यह लास्ट पंक्तियाँ जब  दादी और माँ के पूर्वाग्रह को तोड़ती है ,तो आज की नारी के दिल की बात करती है ,
when i broke away
from my abysmal marriage
all my relatives asked
“what will people say “?
though i was trapped by taboos
and ancestors “legacies,
i broke the oppressive traditions
Uncaged i sang
this is my lot “!!
बहुत सच है न !!
 
mother’s hands a very touchy poem 
while reading poetry ,
words flow from her hands 
her mouth barely moves ,
gold bangles on her arm 
play in the air 
oh !the language of those hands !!
यह माँ के हाथो की वो पहचान है जिसने मुझे भी अपने माँ के हाथो का स्पर्श याद करवा दिया 
 
“kites flying in spring “इस कविता में हर लड़की की दिल की बात और बचपन याद आ जाता है ,जब भाई वो काटा “कह कर पतंगों के पीछे भाग रहे हैं  ,ऊँचे दीवारों को .पेड़ों को पकड के छलांगे लगा रहे  हैं ,उस वक़्त पास ही यह सब देखती लड़की को उत्साह से वही सब करने की कोशिश को रोक लिया जाता है और वो सिर्फ यही सोचती रह जाती है .
“why girls could not fly kites “?इसी में सभी बात लड़के लड़की के फर्क की आ जाती है .सरल भाषा में कही गयी गहरी बातें बहुत ही सुंदर बना देती है इस संग्रह को .”My Amulets” में दादी माँ के के वो सुंदर earrings और उनकी कही बातें खुद के बचपन की याद करवा गयी. जुगनू .मेजिक शूज बहुत ही शानदार कवितायेँ लगी ,पिता के लिए कविता के शुरू में यह लिखना कि आपके बिना मैं कुछ नहीं हूँ ,हर बेटी के दिल की बात है अपने पिता के लिए .पिता और बेटी का स्नेह इस पूरी कविता में खूब उजागर हुआ है ,
और जिस कविता को पढ़ कर मेरी आँखे नम हुई वो है “even the godesses “इस कविता में लड़की जन्म के वक़्त ही उसकी कैसे साँसे रोक दी जाती है ,सिर्फ इस लिए कि वो लड़की के रूप में इस धरती पर आई है और उसी लड़की के देवी रूप को पूजा जाता है ,तब वह देवी माँ भी एक दूसरी औरत द्वारा पूजे जाने पर भी कुछ  नहीं कहती ,सही में यह आज भी एक बहुत बड़ा सच है ,जो रोके जाने पर भी रुक नहीं पा रहा है ,ऊपर लिखे संदर्भ में मैंने नदी और औरत की तुलना करते हुए भी यही लिखा है ,वही करे ज़िक्र में विधवा होने पर सब रंग कैसे उसके सफ़ेद रंग में बड़ा जाते हैं .शुभ ने “Indian widow” में इसका खूब सही ढंग से मार्मिक ब्यान किया है 
“शुभ” के इस संग्रह में शब्द चयन बहुत अच्छे लगे कई जगह जो हिंदी में अपनी बात कहते हैं जैसे ,मेंगो डिलाईट में दसहरी ,लंगड़ा बनारसी ,चौसा ,आदि “सेल्फ portrait”में माया जाल ,राइमिंग विद ब्लेक शाल ,आदि कई ऐसे शब्द आये हैं 
आखिरी कविता में “ॐ शांति “से संग्रह का अंत करना नहीं एक नयी शुरुआत लगा ,नारी और नदी की यह यात्रा अनंत चलती रहेगी और इसी तरह शब्दों में ब्यान होती रहेगी ,इसका बुक कवर” Dr. Era Dabla”द्वारा डिजाइन है जो  बहुत सुन्दर डिजाइन किया गया है ,नदी के पानी में दिखता सूरज का प्रतिबिम्ब एक पोजिटिव ओरा सा प्रतीत होता है ,जो इस नारी और नदी के स्वरुप को अपनी रौशनी में सुनहरे रंग में दिखाई देता है ,
एक छोटे से सुंदर कविताओं की लहरों में डूबते उतरते इसको पढना बहुत ही अच्छा लगा ,शुक्रिया “शुभ “.आपका ,आपसे मुलाकात नेट फेसबुक के जरिये हुए ,सात समुन्द्र पार होते हुए भी हमारी आपस की बात चीत ने इस दूरी की कोई जगह नहीं रखी ,और अब यह तुम्हारा लिखा संग्रह “sacred river” पढ़ कर और भी अधिक तुम्हारी सादगी की मुरीद हो गयी हूँ ,यह मानती हूँ कि लिखे शब्द आपके व्यक्तित्व का आईना होते हैं और आपके इस सरल स्वभाव ने तो पहले ही मेरे  मन को मोह लिया था  पर लिखे ने उस पर मोहर लगा दी ,आप यूँ ही निरन्तर लिखती रहे और नदी ,नारी की यह पवित्र  यात्रा यूँ ही आगे बढती रहे 
इति शुभ !!:) आपके ही कहे अनुसार “ॐ शांति “
Sacred-River

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