पुष्कर बाजार और विदेशी रंग: Evening in Pushkar Market

Pushkar में दूसरा दिन का सवेरा वाकई अदभुत था। इतने सारे पक्षियों का मधुर गान,आकाश में फैली उगते सूरज की लालिमा और भीगी सी  हवा दिल्ली जैसे शहर में कहाँ संभव है। टेंट के आंगन में आये तो देखा मोरनी ,कबूतर, तीतर और नील कंठ पक्षी अपनी महफ़िल जमाये बैठे थे। दिल खुश हो गया देख कर चाय की आदत ने घंटी बजवाई और” प्रभु” हाजिर चाय ले कर विद बिस्किट।   इतने टाइम बाद घूंट घूंट चाय सुड़की जो दिल्ली की रोज सुबह की भागदौड में चाह कर भी नहीं हो पाती ।

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आज दोपहर तक वही रिजोर्ट में सुस्ताने का दिल था ,कारण बहुत तेज धूप का होना था ,सो आराम से चाय पी के स्नान ध्यान नाश्ते करने वहीँ गोलघर पहुंच गए।आलू के परांठे, मसाला चाय ताज़ा दही बहुत ही स्वादिष्ट था सब ।भरपेट नाश्ते के बाद वही पूरे रिजॉर्ट में घूमे,अभी सीजन शुरू नही हुआ था सो गेस्ट अधिक नही थे। बहुत अच्छे से सब maintain कर रखा है ,आप यहाँ साईकल ले कर भी घूम सकते है। थोड़ी देर सुस्ता के 3 बजे जब रेडी हो कर पुष्कर मार्किट के लिए निकले तो आकाश में गहरे बादल छाए हुए थे, गर्म हवा ठंडी हवा में बदल चुकी थी दिल खुश हो गया जैसे मौसम कह रहा हो आओ न रेगिस्तान की यह बरसती शाम भी देखो ।मार्किट तक पहुंचते ही झमाझम बारिश शुरू हो गयी।

शेड में खड़े हुए विदेशी पर्यटकों के रंग ढंग देखते रहे। यहाँ विदेशी पर्यटकों आने वालों की संख्या बहुत है, खासकर Israeli बहुत है। इतने की एक जगह उन्ही का म्यूजिक और खान पान दिखा ।और रोचक जानकारी मिली कि कुछ यहाँ शादी कर लेते है और यही के रीति रिवाज बोली अपना लेते है और इसमें लड़की लड़कियों की संख्या बराबर है। प्रेम वाकई जो न करवाये वो कम है ।दिल जब मिले तो फिर कौन देश ,बोली देखे ।अच्छा लगा यह जान कर पूरा विश्व अपना जैसा भाव दिखे। बारिश रुकी तो हमारी नन्ही ट्रेवलर को तो नदियां दिखने लगी सड़क पर ,छपाक छ्प करते हुए सनसेटकैफे पहुंचे जहां सभी विदेशी पर्यटक ही दिखे। सामने ब्रह्मसरोवर और केसरिया बालम गाने की धुन विदेशी पर्यटकों का हजूम ,न जाने क्यों सब बहुत रहस्यमय सा लगा। दुनिया बहुत छोटी और सिमटी हुई लगी। हम देसी लोग पिज़्ज़ा खा रहे थे और साथ बैठे विदेशी नान दाल मखनी और गट्टाकरी। है न अदभुत!

फिर मार्किट की तरफ निकले रंग बिरंगे राजस्थानी परिधान के साथ  भारतीय कपड़े भी विदेशी रंग लिए अपनी तरफ खींच रहे थे। चांदी के खूबसूरत गहने देखने लायक थे ।गुलाबजल बहुत शुद्ध मिलता है यहाँ वो लिया ।रात गहराने लगी थी ,वापस रिजॉर्ट पहुंचे ।डिनर का मना कर गए थे ,खाया हुआ पिज़्ज़ा हजम हो गया था । जो थोड़ी बहुत भूख लगी थी वह साथ रखे हुए नमकीन,बिस्किट और मसाला चाय से पूरी की गयी। आने वाला कल का दिन दरगाह और वापसी के लिए था। मौसम भीगा हुआ कह रहा था सो मत यही बाहर बैठे रहो,पर थकावट कह रही थी सो जाओ । खैर अभी कल का दिन इस मरुभूमि पर और था सोने की तैयारी की गयी। कल मिलेंगे फिर दरगाह के रंग के साथ

Pushkar market



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