window no 16 under section 214 b (Trump ka USA)

अरे !! शीर्षक पढ़ कर चोंकिये मत बहुत ही दिल के करीब का किस्सा सुनाया जा रहा है सीधे इस खिड़की से । क्या कभी आपने सपने को जो कभी देखा ही नहीं,पर उसको आँखों के आंगन में उतरते और फिर उसके पँखो पर सवार खुद को देखा है ?मैंने  देखा है ,जो अक्सर विदेश यात्रा पर रहते हैं वह इस सेक्शन से परिचय ...

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CHUNNIYON ME LIPTA DARD: Book Review

काव्य संग्रह -चुन्नियों में लिपटा दर्द कवयित्री -हरकीरत हीर प्रकाशक – अयन प्रकाशन मूल्य – 250 /- प्राप्ति लिंक – CHUNNIYON-LIPTA-DARD-HARKIRAT-HEER   कई बार मैं सोचती हूँ कि जब ईश्वर आंसू दर्द बाँट रहा होगा तो उसको “आदम और हव्वा “में कौन अधिक इसके लिए उपयुक्त लगा होगा ? या उस वक़्त की हव्वा ने कहीं अपनी किसी सोच में खुद को तो इस ...

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जश्न जारी है: Amrita Pritam

  ३१ तारीख इसका अमृता के जीवन पर बहुत असर रहा है .जैसे वह ३१ अगस्त को पैदा हुई ..३१ अक्तूबर को उन्होंने आखरी सांस ली ..और उनकी ही ज़िन्दगी से जुडा एक ३१ जुलाई १९३० और है .जब उनको ज़िन्दगी एक नए मुकाम पर खड़ी हुई होगी …..जिसके बारे में उन्होंने लिखा है  कोई ग्यारह बरस की थी जब एक दिन अचानक माँ ...

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Sahir Ludhianvi :अफसाना प्यार का

जब मैं अमृता के घर गई थी तो वहाँ  की हवा में जो खुशबू थी वह महक प्यार की एक एक चीज में दिखती थी इमरोज़ की खूबसूरत पेंटिंग्स ,और उस पर लिखी  अमृता की कविता की पंक्तियाँ ..देख के ही लगता है जैसे सारा माहोल वहाँ का प्यार के पावन एहसास में डूबा है ..और दिल ख़ुद बा ख़ुद जैसे रूमानी सा हो ...

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चाँद और करवाचौथ : Amrita Preetam

नजर के आसमान से सूरज कहीं दूर चला गया पर अब भी चाँद में . उसकी खुशबु आ रही है … तेरे इश्क की एक बूंद इस में मिल गई थी इस लिए  मैंने उम्र की सारी  कडवाहट  पी ली .. अमृता के कहे से : Amrita Preetam का कहना था कि दुनिया कि कोई भी किताब हो हम   उसके चिंतन का दो बूंद ...

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यह नही खाना वो नही खाना : World Food Day 16 October

आलू कहता मुझको खा लो,मै तुमको मोटा कर दूंगा टमाटर कहता मुझको खा लो मै तुम्हे लाल लाल कर दूंगा यह कविता हमने भी बचपन में पढ़ी और अपने आने वाली पीढ़ियों को भी पढ़ा रहे. कविता के माध्यम से बच्चो को हर खाने के गुण से परिचित करवाना और जो जिस सब्ज़ी के गुण है उस से परिचित करवाना होता है. मेरे ख्याल ...

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doodle story

मानव मन चंचल होता है शान्त बैठना इसका स्वभाव नही है .हम कुछ भी करते वक़्त अक्सर सब कुछ ना कुछ यदि पेन और काग़ज़ सामने दिखे तो कुछ लिखते रहेंगे या कुछ चित्र बनाते रहेंगे ..बिना सोचे विचारे बात करते करते कभी यह चित्र बहुत ही मज़ेदार बन जाते हैं कि आप ख़ुद ही तारीफ़ करने लगते हैं |कभी कभी सिर्फ़ अपने नाम ...

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