Love ThEn and NOW

प्यार तब और अब …………….. वक़्त कितनी तेजी से बदलता है न ? जब हमने होश संभाला तो इस तरह के रूमानी ख्यालों में खोये कि आज तह उभर नहीं पाए ,यह बात और है कि उम्र तमाम हुई इस के रूमानी दुनिया की खोज में 🙂 और आज के दिल्ली टाइम्स प्यार का यह रंग पढ़ा और लिखा हुआ अपना याद आया  प्यार ...

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विश्व हास्य दिवस: world laughing day

laughing kid

किसी की मुस्कराहटों पर हो निसार ..किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार .जीना इसी का नाम है ” कितना प्यारा गाना है न यह ..एक छोटी सी मुस्कराहट जिंदगी में बदलाव ला देती है| हँसाना ,हँसना मुस्कराना आज कल की तनाव भरी जिंदगी में बहुत जरुरी है | नही तो अवसाद तक की हालत में पहुच सकते हैं ..जिंदगी है तो मुश्किलें ...

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प्लेटोनिक लव with AMRITA PREETAM

अमृता के बारे में कई लोग ऐसा मानते हैं कि अमृता अपने लेखन में निरे भावुक स्तर पर ठहर गई और उनका पूरा लेखन प्लेटोनिक लव और उस से जुड़ी इमोशंस के इर्द गिर्द ही घूमता रहा है | और उस में निरी भावुकता होती है ..इस पर अमृता ने जवाब दिया यह भावुकता नही है कोरी ..इसको इमोशंस की ” रिचनेस” कह सकते ...

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window no 16 under section 214 b (Trump ka USA)

अरे !! शीर्षक पढ़ कर चोंकिये मत बहुत ही दिल के करीब का किस्सा सुनाया जा रहा है सीधे इस खिड़की से । क्या कभी आपने सपने को जो कभी देखा ही नहीं,पर उसको आँखों के आंगन में उतरते और फिर उसके पँखो पर सवार खुद को देखा है ?मैंने  देखा है ,जो अक्सर विदेश यात्रा पर रहते हैं वह इस सेक्शन से परिचय ...

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जश्न जारी है: Amrita Pritam

  ३१ तारीख इसका अमृता के जीवन पर बहुत असर रहा है .जैसे वह ३१ अगस्त को पैदा हुई ..३१ अक्तूबर को उन्होंने आखरी सांस ली ..और उनकी ही ज़िन्दगी से जुडा एक ३१ जुलाई १९३० और है .जब उनको ज़िन्दगी एक नए मुकाम पर खड़ी हुई होगी …..जिसके बारे में उन्होंने लिखा है  कोई ग्यारह बरस की थी जब एक दिन अचानक माँ ...

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Sahir Ludhianvi :अफसाना प्यार का

जब मैं अमृता के घर गई थी तो वहाँ  की हवा में जो खुशबू थी वह महक प्यार की एक एक चीज में दिखती थी इमरोज़ की खूबसूरत पेंटिंग्स ,और उस पर लिखी  अमृता की कविता की पंक्तियाँ ..देख के ही लगता है जैसे सारा माहोल वहाँ का प्यार के पावन एहसास में डूबा है ..और दिल ख़ुद बा ख़ुद जैसे रूमानी सा हो ...

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यह नही खाना वो नही खाना : World Food Day 16 October

आलू कहता मुझको खा लो,मै तुमको मोटा कर दूंगा टमाटर कहता मुझको खा लो मै तुम्हे लाल लाल कर दूंगा यह कविता हमने भी बचपन में पढ़ी और अपने आने वाली पीढ़ियों को भी पढ़ा रहे. कविता के माध्यम से बच्चो को हर खाने के गुण से परिचित करवाना और जो जिस सब्ज़ी के गुण है उस से परिचित करवाना होता है. मेरे ख्याल ...

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