रॉयल ट्रेवेल विद @Orchard Tent Resort

Orchard resort pushkar

जब कोई प्रोग्राम अचानक से बने तो वह प्रोग्राम बहुत  ही दिल के करीब होता है | पिछले वीकेंड पुष्कर अजमेर का प्रोग्राम बना तो मेरी घुमक्कड़ी तबियत को जैसे सकूं मिला | पुष्कर अजमेर पहले २०१४  में जाना हुआ था पहली बार यह तब भी मनमोहक लगा था और अब दूसरी बार जाने पर भी उतना ही  आकर्षण लगा इस जगह में, यहाँ आप पहली ...

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Maheshwar (PURE CITY ) MP me dil hua bacche sa part 2 :Travel Review

सुबह नाश्ता भरपूर  करके अगली मंजिल “महेश्वर “की तरफ बढ़ चले ,इंदौर को चलते हुए यही कहा “मिलते हैं फिर”क्यूंकि वापसी की फ़्लाइट इंदौर से ही थी , (महेश्वर एक प्योर सिटी ) महेश्वर इंदौर से सिर्फ ९० किलोमीटर की दूरी पर है ,यह मध्य प्रदेश के “खरगौन ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर तथा प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह नर्मदा नदी के किनारे पर ...

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MP mein dil hua bacche sa : Travel Review

बंजारा मन कहीं देर तक टिकता नहीं न ,जिन्हें घूमने  का शौक हो रास्ता निकल ही जाता है ,कहीं पढ़ा था ,ट्रेवेल के बारे में कि, “आप कहाँ पैदा हो ,यह आपके बस में नहीं ,पर आप कहाँ कहाँ घुमे ,दुनिया देखे यह आपके बस में जरुर है , “बस यही सोच का कीड़ा जब काटने लगता है तो अपना सफरबक्से में दो दिन के ...

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मुंबई सपनो का शहर :Travel Review Mumbai

Mumbai सपनो का शहर माना जाता है ..वह सपने जो जागती आँखों से देखे जाते हैं ..और बंद पलकों में भी अपनी कशिश जारी रखते हैं ..पर सपना ही तो है जो टूट जाता है …यही लगा मुझे मुंबई शहर दो बार में देख कर …….. ..हम्म शायद मुंबई वाले मुझसे इस कथन पर नाराज हो जाएँ ..हम जिस शहर में रहते हैं वही ...

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Saykilon ka shahar Barlin (Sangeeta Sethi ) Book review

बर्लिन सपनो में अब तक जाने वाली जगह है न ? बोधि प्रकाशन के साए तले प्रकाशित हुई sangeeta sethi की यह किताब मेरी जर्मनी यात्रा “साइकलों का शहर बर्लिन देखी” और दूसरी किताब “जार्डन यात्रा ,”देखी तो मंगवा ली और अभी यह जर्मनी यात्रा पढ़ कर समाप्त की है ,Sangeeta sethi के Spandan ब्लॉग बहुत पहले एक बार पढ़ा था ,तब इनकी लिखी ...

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Chail camere ki nazer se चैल

chail

कुदरत के यह रंग हरा उम्मीदों वाला आसमानी सपनो का  गुलाबी लाल बदरंग ढलवां छत्तों पर टप टप  गिर के ठिठकी खड़ी हैं पानी की बूंदें करीब   से  गुजरते हुए यह बादलों के काफिले  कांपती हुई हवा की सरगोशियाँ पेड़ों की टहनी से लिपटती हटती  इसी को महसूस कर मैंने भी सिमट कर खुद को ओढ़ लिया है तेरी निग्गी यादों में , ...

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Mela Vs Carnival

Mela Vs  Carnival : क्या आपको अपना बचपन याद है ,कितने मेले लगते थे तब और हम उनमे क्या देखते थे ,मुझे जहाँ तक याद है अधिकतर मेले दशहरा, दिवाली पर लगते थे .और कुछ मेले सर्कस के साथ जुड़े होते थे .सर्कस वाले  वाले मेले  तो अब न के बराबर ही रह गए हैं,और बाकी मेलों में भी अब नए तौर तरीके आ ...

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