औली india का सुन्दर पर्यटन स्थल ( Auli)

हमारा देश भारत बहुत ही सुन्दर पर्यटन स्थलों से घिरा हुआ है, उतराखंड इन में से एक हैं और यहाँ के औली पर्यटन स्थल के कहने ही क्या। आज यही के बारें में बहुत सारे प्रश्नों का जवाब देने की कोशिश रहेगी। आईये पहले देखे की यह सुन्दर स्थल ओली है कहाँ पर ? बादल, हवा और खूबसूरत नजारे, क्या नहीं है यहां उतराखंड के औली पर्यटन स्थल में?

स्केटिंग के लिए मशहूर औली

ऋषिकेश से देवप्रयाग ,श्रीनगर,  रुद्रप्रयाग और जोशीमठ को पार करते हुए हम “औली ” पहुचते हैं , यह रास्ता बहुत ही रोमांचक है , पर जोशीमठ से 14 किलोमेटर उँचाई पैर स्केटिंग के लिए मशहूर औली   में अपने में अदभुत सुंदरता समेटे हुए हैं ..वहाँ बनी हट्स और उस के सब तरफ़ खिले सफ़ेद फूल , आस पास विशाल पहाड़ दूर  जैसे हम से कहतें हैं  कि “आओ कुछ देर हमारे साए में अपनी ज़िंदगी की सारी भाग दौड और परेशानी भुला दो ..बस कुछ पल सिर्फ़ यहाँ की सुंदरता में खो जाओ ..भर लो बहती ताज़ी हवा जो शायद कुछ समय बाद यहाँ भी नही मिलेगी ….. बादलो के बीच में ट्राली का सफ़र जैसे बादलो के संग ही उड़ता सा लगता है … चेहरे को छूते बादल जैसे अपने स्पर्श से बता देना चाहते हैं कि जो ठंडक उन में है वो आज के चलते ए-सी में नही  और यह पहाड़ जब सर्दी में सफ़ेद बर्फ़ से ढ़क जाते हैं तो कितने सुंदर लगते होंगे इसका अंदाज़ा यहाँ पर बिखरी सुंदरता से आसानी से लगाया जा सकता है ….उपर कुछ पहाड़ो में लगे देवदार के पेड़ जैसे किसी समाधी में लीन लगते हैं।  ऊँचे ऊँचे आसमान छूते सफ़ेद चमकीले पहाड़ मीलों दूर तक फैली सफ़ेद बर्फ की चादर दूर दूर तक दिखते बर्फीली चोटियों के दिलकश नज़ारे ! यहां से नंदा देवी, त्रिशूल, कमेत, माना पर्वत, दूनागिरी, बैठातोली और नीलकंठ का बहुत ही सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। 

यहाँ किस प्रकार से पहुँचें

यहाँ पहुंचने का सबसे सही मार्ग सडक ही है निकट एयरपोर्ट देहरादून है जो कि औली से 298 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तथा निकट रेल मार्ग 235 किलोमीटर की दूरी पर ऋषिकेश के पास स्थित है। देहरादून से औली का किराया ६००० से ७००० भारतीय रुपये के लगभग है l ऋषिकेश से औली २५३  किलोमीटर के लगभग है और सीजन के अनुसार टैक्सी किराया सेट रहता है। ऋषिकेश से आप बस द्वारा भी जोशीमठ पहुँच सकते हैं। जोशी मठ पहुंच कर औली तक पहुंचने के लिए रोप वे का भी बढ़िया इंतजाम है। जोशी मठ से औली रोपवे की दूरी 4 किलोमीटर है। इसकी स्पीड देश के बाकी रोप वे से अधिक मानी जाती है। देवदार के घने जंगल से होते हुए यह ढलानों के ऊपरी छोर तक पहुंच जाता है। ऊंचाई के कारण ऐसा लगता है कि मानों आप बादल के बीच में उड़ रहे हों। इससे दूर-दर तक बर्फ से ढकी पहाड़ियों को भी आप दूरबीन की मदद से साफ देख सकते हैं।  अगर आप गाड़ी से जा रहे हैं तो जोशीमठ पहुंचने से तकरीबन आधा किलोमीटर पहले एक सड़क दाईं ओर औली के लिए जाती है जिस पर लगातार घुमावदार चढ़ाई में जंगल से गुजरते हुए तकरीबन 16 किलोमीटर चलने के बाद आप औली पहुंचते हैं। घुमावदार पहाड़ियों से जाने पर आपको 40 मिनट लग सकते हैं। औली जाने के लिए बस सेवा नहीं है, लेकिन जोशीमठ से प्राइवेट टैक्सियां मिल जाती हैं। रेल द्वारा आप ऋषिकेश या काठगोदाम तक ही पहुंच सकते है। यहा से आगे आपको सडक मार्ग द्वारा जाना पडेगा।

यहाँ पर रुकने की जगह कौन सी है ?

यहां ठहरने के लिए गढ़वाल विकास निगम ने एक गेस्ट हाउस बनाया हुआ है जिसमें लगभग 110 रूम हैं। सभी तरह के बजट वालों के लिए यह सुविधाजनक है। भारत-तिब्बत पुलिस का भी यहां पर रेस्ट्रॉन्ट है। वैसे यहां ठहरने के लिए कॉटेज और हट की व्यवस्था भी है। आप चाहें तो यहां से घूमने के बाद ठहरने के लिए जोशीमठ भी जा सकते हैं। जोशीमठ में ढेरों होटल व गेस्ट हाउस हैं।

औली में रूकने के लिए क्ल्फि टॉप रिसोर्ट सबसे अच्छा स्थान है। यहाँ से नंदा देवी, त्रिशूल, कमेत, माना पर्वत, दूनागिरी, बैठातोली और नीलकंठ का बहुत ही सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। इसमें 46 कमरे हैं। यह स्की क्षेत्र की ढलान पर टावर न. 8 के नीचे स्थित है। यहाँ पर खाने-पीने की अच्छी सुविधा है। यह चारों तरफ से बर्फ से घिरा हुआ है। इसके अलावा इसमें एक रेस्तरां और कैफे भी है। जो पर्यटक ज्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते, औली में उनके लिए जी.एम.वी.एन. स्किंग और टूरिस्ट रिसोर्ट सबसे बेहतर विकल्प है। यह 9,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ ठहरने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहाँ से बर्फ की सुन्दर चोटियों का सुन्दर नजारा देखा जा सकता है। यह मुख्य सड़क मार्ग के बिल्कुल पास है। इस रिसोर्ट में लकड़ी की बनी 16 झोपड़ियाँ, सोने के लिए 3 सराय जिसमें 42 बेड हैं, स्की कराने की व्यवस्था, वातानुकूलित और गर्म पानी की सुविधा है। यहाँ भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस का स्की स्कूल है। पर आम पर्यटकों को इसमें जाने की  अनुमति नहीं है।

यहाँ क्या देखे और क्या करें ?

स्की के शौकीन लोगों के लिए औली स्वर्ग है। पर स्किइंग के अलावा रॉक क्लाइम्बिंग, फॉरस्ट कैम्पिंग और घोड़े की सवारी आदि भी की जा सकती है । किन्तु यह महंगे बहुत हैं। नंदा देवी के पीछे सूर्योदय देखना एक बहुत ही सुखद अनुभव है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान यहाँ से 41 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा बर्फ गिरना और रात में खुले आकाश को देखना मन को प्रसन्न कर देता है। शहर की भागती-दौड़ती जिंदगी से दूर औली एक बहुत ही बेहतरीन पर्यटक स्थल है।स्की करने के लिए व्यस्कों से रू. 475 और बच्चों से रू. 250 शुल्क लिया जाता है। स्की सीखाने के लिए रू. 125-175, दस्तानों के लिए रू. 175 और चश्मे के लिए रू. 100 शुल्क लिया जाता है। 7 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से रू. 4,710 और विदेशी पर्यटकों से रू. 5,890 शुल्क लिया जाता है। 14 दिन तक स्की सीखने के लिए भारतीय पर्यटकों से रू. 9,440 और विदेशी पर्यटकों से रू. 11,800 शुल्क लिया जाता है।इसके अलावा यहाँ पर जंगलों में भी घूमा जा सकता है। इन जंगलों में खूबसूरत बलतु और कॉनीफर के वृक्ष पाए जाते हैं।

औली जाने का मौसम

औली ऊचाई पर स्थित होने के कारण यहा का मौसम अधिकतर ठंडा ही रहता है। औली जाने के लिए सबसे अच्छा मौसम गर्मीयो का होता हैl  गर्मीयो में औली का तापमान अधिकतम 15℃ से न्यूनतम 7℃ तक रहता है। अगर आप औली में बर्फबारी देखना चाहते है या आईस स्पोर्टस का आनंद उठाना चाहते है तो  जनवरी  में भी जा सकते। सर्दियों  में औली का तापमान अधिकतम 4℃ से माइनस -8℃ तक रहता है। इस समय यहा चारो तरफ बर्फ ही बर्फ होती है l  पर स्की करने वालों के लिए जनवरी से मार्च तक का मौसम सबसे अच्छा है ।

औली जाने की तैयारी

यह कुछ मुश्किल जगह है ,  जून में भी यहाँ मौसम हमने ठंडा खूब महसूस किया है .गर्मी में भी बिना गर्म कपड़ों के जाना आपको बीमार कर सकता है। और बहुत ठंड के मौसम में छोटे बच्चो को साथ लेकर  औली की यात्रा बच्चो के लिए कष्टदायक हो सकती है। मानसून यानि बरसात के मौसम में यहा वर्षा औसत से कम होती है इस समय यहा का तापमान 12℃ तक रहता है जो वर्षा होने की स्थिति में और भी नीचे तक चला जाता है। इसलिए औली पर्यटन स्थल की यात्रा पर आने से पहले पेंकिग करते समय गर्म वस्त्र रखने बहुत जरूरी हैं। यहाँ घूमने के लिए पर्यटकों को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि औली आने से पहले शारीरिक व्यायाम करें और रोज दौड़ लगाएं।

यहाँ पर ठीक रहने और सर्दी से बचने के लिए अच्छे किस्म  के गर्म कपड़े पहनना बहुत आवश्यक है। गर्म कपड़ों में कोट, जैकेट, दस्ताने, गर्म पैंट और जुराबें होनी बहुत आवश्यक हैं। इन सबके अलावा अच्छे जूते होना भी बहुत जरुरी है। घूमते समय सिर और कान पूरी और अच्छी तरह से ढके होने चाहिए। आँखो को बचाने के लिए चश्में का प्रयोग करना चाहिए। यह सामान जी.एम.वी.एन. के कार्यालय से किराए पर भी लिए जा सकते हैं। जैसे-जैसे आप पहाड़ों पर चढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे पराबैंगनी किरणों का प्रभाव बढ़ता जाता है। यह किरणे आँखों के लिए बहुत हानिकारक होती हैं। इनसे बचाव बहुत जरूरी है। अत: यात्रा पर जाते समय विशेषकर बच्चों के लिए भी अच्छी क्वालिटी  वाले चश्मे का होना बहुत जरूरी है।  बहुत  ठंड के कारण त्वचा रूखी हो जाती है। त्वचा को रूखी होने से बचाने के लिए विशेषकर होंठो पर एस.पी.एफ. क्रीम का प्रयोग करना चाहिए। ठंड में ज्यादा देर रहने से शरीर की नमी उड़ जाती है और डिहाईडरेशन  की समस्या सामने आती है। इस समस्या से बचने के लिए खूब पानी पीना चाहिए।

तो यह थी हमारे उतराखंड के सुन्दर स्थान औली के बारे में सभी तरह की जानकरी  अब आप पूरी तेयारी के साथ यहाँ जा सकते हैं  यहाँ पर लिखे सब तरह की जानकरी पढ़ कर।

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