Araku Valley (अराकू वैली)

हमारा देश भारत कई सुन्दर जगह से भरा हुआ है ,जरूरत है सिर्फ वहां जाने की और अपनी निगाह से देखने की , वाईजेग ,विशाखापट्टनम पर्यटक स्थल वाकई  स्वर्ग जैसा  है! यहाँ के समुन्दर तट बहुत ही सुन्दर है .लाल रेत मिटटी में खिले फूल और हरियाली बरबस रोक लेती है |
अछूते साफ़ पानी वाले समुन्दर तट जैसे दिल को अजीब सा सकून करवाते हैं ….समुन्दर किनारे बने हुए घर ..आधुनिक और पुराने दोनों का मिश्रण है ….भाग दौड़ से दूर शांत जगह वाकई कई बार वहां यही दिल हुआ कि काश यही रह पाते :)आदिवासी और नेवी हलचल में सिमटा यह शहर अपने में अनूठा है |यही पर है एक खूबसूरत वैली ,अराकू वैली , आइये आज इसी की सैर पर निकलते हैं .

यह अराकू वैली कहाँ है ?

अराकू घाटी आंध्र प्रदेश के दक्षिण भारतीय राज्य में विशाखापट्टनम जिले में एक प्रसिद्ध खूबसूरत हिल स्टेशन है।
अराकू घाटी वाईजेग  शहर से 114 किलोमीटर की दूरी पर है और #उड़ीसा की सीमा के बहुत करीब है। एक खूबसूरत हिल स्टेशन होने के अलावा, अराकू घाटी अपने  कॉफी बागानों के लिए भी प्रसिद्ध है। ताजे कॉफी बीन्स की सुगंध अराकू की पूरी हवा में है। आदिवासी सहज लोग आपका दिल जीत लेते हैं  एकांतप्रिय पर्यटकों के लिए #अराकू वैली सचमुच एक बहुत अच्छा पर्यटन स्थल है

यहाँ के देखने लायक स्थान

अराकू घाटी में और आसपास के पर्यटक स्थल अराकू घाटी जनजातीय संग्रहालय, टाइडा, बोर्रा गुफाएं, सांगडा झरने और पदमपुरम बॉटनिकल गार्डन सहित यात्रा करने के लिए  दिलचस्प स्थान हैं।  इस घाटी में ही है   “बोरा गुफाएं ” तेलुगु में बुर्रा का अर्थ है-‘मस्तिष्क’. इसी शब्द का एक अर्थ यह भी है कि ज़मीन में गहरा खुदा हुआ.  “बोरा गुफाएं “विशाखापट्टनम से 90 किलोमीटर की दूरी पर हैं। ये ईस्टर्न घाट में दो वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली हुई हैं। यह गुफाएं १५ करोड़ साल सालों पुरानी बताई जाती हैं.इन्हें” विलियम किंग जोर्जे “नमक एक अंग्रेज ने सन् १८०७ में खोज निकला था.|भूवैज्ञानिकों के शोध कहते हैं कि लाइमस्टोन की ये स्टैलक्लाइट व स्टैलग्माइट गुफाएं गोस्थनी नदी के प्रवाह का परिणाम हैं। हालांकि अब नदी की मुख्य धारा गुफाओं से कुछ दूरी पर स्थित है लेकिन माना यही जाता है कि कुछ समय पहले यह नदी गुफाओं में से होकर और उससे भी पहले इनके ऊपर से होकर गुजरती थी।

नदी के पानी के प्रवाह से कालान्तर में लाइमस्टोन घुलता गया और गुफाएं बन गयीं। अब ये गुफाएं अराकू घाटी का प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।गुफाएं अन्दर से काफी बड़ी  हैं। उनके भीतर घूमना एक अदभुत अनुभव है। अंदर घुसकर वहां एक अलग ही दुनिया नजर आती है। कहीं आप रेंगते हुए मानों किसी सुरंग में घुस रहे होते हैं तो कहीं अचानक आप विशालकाय बीसियों फुट ऊंचे हॉल में आ खडे होते हैं। सबसे रोमांचक तो यह है कि गुफाओं में पानी के प्रवाह ने जमीन के भीतर ऐसी-ऐसी कलाकृतियां गढ दी हैं कि वे किसी उच्च कोटि के शिल्पकार की सदियों की मेहनत प्रतीत होती हैं।  कोई आकृति किसी जानवर के आकार जैसी दिखती है तो कहीं कोई किसी पक्षी जैसी नजर आती है।इतने शिल्प कि उन्हें नाम देते-देते आपकी कल्पनाशक्ति नए नाम देते देते थक जाए  | एक जगह तो चट्टानों में थोडी ऊंचाई पर प्राकृतिक शिवलिंग  बन गया है कि उसे बाकायदा लोहे की सीढियां लगाकर मंदिर का रूप दे दिया गया है। कहीं आपको जमीन को बांटती एक दरार भी नजर आ जायेगी तो कहीं आपको बडे-बडे खम्भे या फिर लम्बी लटकती जटाओं सरीखी चट्टानें मिल जायेंगी।

इन गुफाओं को खोजने की कहानी भी काफी रोचक है। पुरानी कहानी है कि उन्नीसवीं सदी के आखिरी सालों में निकट के गांव से एक गाय खो गयी। लोग उसे ढूंढने निकले और खोजते-खोजते पहाडियों में गुफाओं तक पहुंच गये। बताया जाता है कि गाय गुफा के ऊपर बने छेद से भीतर गिर गयी थी और फिर भीतर-भीतर होती हुई नदी के रास्ते बाहर निकल गई। गाय मिलने से ही नदी को भी “गोस्थनी” नाम दे दिया गया। बाद में किसी अंग्रेज भूशास्त्री ने गुफाओं का अध्ययन किया। इन्हें मौजूदा पहचान आजादी के बहुत बाद में मिली। अब ये देश की प्रमुख गुफाओं में से एक हैं।

गुफा का प्रवेश द्वार काफी बड़ा  है। अंदर रौशनी की व्यवस्था है और गाइड भी उपलब्ध हैं जो अन्दर की सैर कराते हैं। गुफा का प्रबन्धन आन्ध्र प्रदेश पर्यटन विभाग के हाथों में है। आसपास खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था है। अराकू होते हुए पहाडियों में यहां आने का रास्ता भी बडा मनोरम है। रास्ते में जगह जगह मिलता नारियल पानी और मक्की भुट्टा आपको सहज ही रोक लेंगे |गुफा के निकट तो रुकने की जगह नहीं लेकिन लगभग बीस किलोमीटर पहले अराकू  घाटी में रुकने के लिये अच्छे होटल हैं।  अराकू घाटी में कुछ और स्थान हैं जो आप वहां देख सकते हैं .यहाँ का जनजातीय  संग्रहालय देखने लायक है  यह संग्रहालय हालांकि बहुत बडा तो नहीं है, परन्तु सहज प्रवेश और बीच जगह पर  होने से यहां पर पर्यटन सीजन के दिनों में दिन भर मेला सा लगा रहता है। इसकी खासियत  अनूठा डिजाइन तो है ही साथ में इसमें आदिवासी जनजीवन की झलक का प्रस्तुतिकरण भी बेहद प्रभावी है। अपनी बात यह वहां बने शिल्प .कला मूर्ति के कारण समझा देता है | गोलाकार संरचना लिये यह संग्रहालय दो मंजिल का है। इसमें राज्य के आदिवासी  क्षेत्र के जनजीवन को दिखाया  गया है।

अराकू घाटी तक कैसे पहुंचे

हिल स्टेशन अच्छी सड़कों और अच्छे रेल नेटवर्क के माध्यम से यह देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा है। यहां दो रेलवे स्टेशन हैं, एक अराकू में और दूसरा अराकू घाटी में। दोनों रेलवे स्टेशन वाईजेग  में रेलवे स्टेशन से जुड़े हैं।यह वाईजेग से ८१ किलोमीटर है ,और वहां से पहुंचने में ३ घंटे लग जातें है .ट्रेन की बुकिंग ,बस की बुकिंग आप ऑनलाइन भी कर सकते हैं .

हिल स्टेशन पर कोई हवाई अड्डा नहीं है, पर  पहाड़ियों तक जाने वाली सड़कें बहुत सही हैं  हैं।  अराकू घाटी तक पहुँचने के लिए आंध्र प्रदेश के किसी भी कस्बे और शहर से निजी टैक्सी ले सकते हैं। अराकू तक जाने और वहां से वापसी के लिए नियमित बस सेवाएं चलाने वाले कई बस ऑपरेटर हैं। हैदराबाद और विशाखापत्तनम से अराकू घाटी के लिए डीलक्स और वोल्वो बसें भी उपलब्ध हैं। बसों का किराया निजी कैब की तुलना में कम है लेकिन डीलक्स बसों और वोल्वो का किराया सामान्य बस के किराए से अधिक है।हम कैब में गए थे ,रास्ते में काफी बगान के नज़ारे और आदिवासी जीवन को देखने का अनुभव बहुत ही यादगार रहा .

यहाँ का फेमस आदिवासी नृत्य धीमसा (dhimsa)

यह यहाँ का आदिवासी नृत्य  है, जो पोरजा जाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है। 15-20 महिलाओं का एक समूह एक गोलाकार में डांस करते हैं और अपने देवता से अपने घर की सुख शान्ति मांगते हैं  .घुटनों तक साडी में लिपटी हुई आदिवासी औरतें वहां से खूबसूरत गहनों से सजी होतीं है और मुख्य लीडर डांस करने वाली महिला  अपने हाथ में एक मोर पंख भी रखती है। इस नृत्य की शुरुआत  ओडिशा के कोरापुट जिले में हुई है लेकिन यह विशाखापट्टनम का मुख्य डांस   बन गया है। धीमसा डांस यहाँ के परिवेश को बताता है इसको स्त्री पुरुष दोनों ही कर सकतें हैं .

यहाँ घूमने का समय

अराकू घाटी की यात्रा के लिए आप यहाँ कभी भी आ सकते हैं . जब मैदानी इलाके बहुत गर्म हो जाते हैं, तब घाटी के आसपास के कस्बों और शहरों से लोग गर्मियों के दौरान इस जगह की यात्रा करना पसंद करते हैं। हालांकि, घाटी की सुंदरता का आनंद लेने के लिए सबसे अच्छा समय सर्दियों का  मौसम होता है।

यहाँ कहाँ ठहरे

अराकू वैली में कोई रुकने का स्थान नहीं है पर आप इसके आसपास कई रिजेनबल होटल में ठहर सकतें है .Haritha Hill Resort यहाँ बहुत बढ़िया है ,यहाँ का किराया २००० rs के लगभग है .बाकी होटल भी साफ़ सुथरे और सही रेट पर मिल सकते हैं ,हम सुबह जा कर पूरा वहां घूम कर शाम को विशाखा पट्टनम वापिस आ गए थे .आप यह भी कर सकते हैं .

 

विशाखा पट्टनम की  यह यात्रा  फ़रवरी 2012 में की थी ।  तब से इसको यूँ ही यादो में जी रही हूँ।  बहुत कुछ बता के भी अनकहा रह गया है । तस्वीरों में सब याद सिमटी हुई है .आपको भी जब भी मौका मिले तो इस अछूते पर्यटक स्थल को देखने जरुर जाएँ

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