शबाना आज़मी अदभुत व्यक्तित्व

हिंदी सिनेमा बालीवुड ने बहुत से अच्छे लोगों और अच्छे अदाकारों से हमें परिचित करवाया है ,उनमें से शबाना आज़मी का नाम किसी से अनजाना नहीं है . आज की इस पोस्ट में इसी अदभुत व्यक्तित्व वाली शबाना आज़मी के बारे में कुछ जानेंगे

 

शबाना आज़मी एक मशहूर अदाकारा

इनका जन्म 18 सितेम्बर १९५० को हैदराबाद में हुआ ,शबाना आजमी ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1973 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘अंकुर’  से की थी।   इस फिल्म की सफलता ने शबाना आजमी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई।  अपनी पहली ही फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ। फिल्म अकुंर के बाद 1983 से 1985 तक लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया. अर्थ, खंडहर और पार जैसी फिल्मों के लिए उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया।

उनकी फिल्में

उस दौर में शबाना ने खुद को ग्लैमरस अभिनेत्रियों की भीड़ से स्वयं को अलग साबित किया। अर्थ, निशांत, अंकुर, स्पर्श, मंडी, मासूम, पेस्टॅन जी में शबाना आजमी ने अपने अभिनय की अमिट छाप दर्शकों पर छोड़ी। अमर अकबर एंथोनी, परवरिश, मैं आजाद हूं जैसी व्यावसायिक फिल्मों में अपने अभिनय के रंग भरकर शबाना आजमी ने नाटक मंच के दर्शकों के साथ-साथ आम दर्शकों के बीच भी अपनी पहुंच बनाए रखी।प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में उनका योगदान उल्लेखनीय है। फायर जैसी विवादास्पद फिल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया वहीं, बाल फिल्म मकड़ी में वे चुड़ैल की भूमिका निभाती हुई नजर आई।  यदि मासूम में मातृत्व की कोमल भावनाओं को जीवंत किया तो वहीं, गॉड मदर में प्रभावशाली महिला डॉन की भूमिका भी निभाकर लोगो को हैरत मे डाल दिया। भारतीय सिनेमा जगत की सक्षम अभिनेत्रियों की सूची में शबाना आजमी का नाम सबसे ऊपर आता है।सुराग फिल्म में वह और टीना मुनीम राजेश खन्ना के साथ थी ,हम पांच में अमरीशपुरी ,और संजीव कुमार के साथ काम किया है  . अभी उनका नीरजा और अन्य फिल्मों में काम देखने को मिला ।दस कहानियां में उनका चरित्र भूले नहीं पुरुष प्रधान फिल्म बनाने वाले बॉलिवुड में इनके कारण महिला प्रधान फिल्में बनीं और इनके चरित्र के सामने पुरूष चरित्र इनकी किसी फिल्म में कहीं टिक नहीं सके। मासूम फिल्म में नसीर जैसे किरदार को अपने अभिनय से छोटा कर दिया।

उनको मिले सम्मान

शबाना आजमी को भारत सरकार की तरफ से 1988 में ‘पद्मश्री’ और 201 2 में ‘पद्म भूषण’ सम्मान दिया गया.शबाना आजमी को देशी-विदेशी सिनेमा के अभूतपूर्व योगदान के लिए “न्यूयॉर्क “शहर प्रशासन ने साल 2012 में सम्मानित किया था। यह पहला मौका था, जब किसी भारतीय कलाकार को “न्यूयॉर्क शहर “की ओर से सम्मानित किया गया था।

उनका वैवाहिक जीवन .

वह जावेद अख्तर की दूसरी बीबी हैं और इस जोड़ी की मिसाल पूरे  बालीवुड में दी जाती है ,उनकी अपनी कोई संतान नहीं है पर जावेद अख्तर के बच्चे फरहान और जोया उन्हें माँ जैसा पूरा सम्मान देते हैं .

उनके सामाजिक कार्य

इस वक्त का उपयोग वह अपने पिता के बचे हुए कार्यों को पूर्ण करने में लगा रही हैं ।उनके पिता कैफी आजमी अन्तिम दिनों में उत्तर प्रदेश के “मिन्ज्वा गांव “में जा कर रहने लगे थे वहाँ उन्होंने कई सुधार और विकास के काम शुरू किए थे । शबाना आजमी उन्ही कार्यों को पूरा करने में जुटी हैं।  इसके अलावा संसद  में समय समय पर वह विभिन्न मुद्धो पर अपने विचारों को रखती है। वह औरतों के जुड़े मसले जैसे उनकी सेहत जनसंख्या पर बहुत गंभीरता से सोचती है उन्हें अफ़सोस  होता है कि आजादी के इतने सालों  बाद भी हम देश में सुरक्षित माँ बनने का हक औरत को नही दे पाये हैं । प्रसव  के दौरान आज भी कई इलाकों में माँ और बच्चे दोनों की मौत हो जाती है अगर इतनी मौते किसी आतंकवादी हादसे में होती तो सरकार बदल गई होती।

एक जागरूक  अभिनेत्री के रूप में उन्हें बहुत अच्छे से पहचाना  जाता है देश दुनिया के कई शहरों में उनकी फिल्मों  का पुनरावलोकन चलता रहता है इस तरह के आयोजन एक कलाकार को नई पहचान देते हैं और उस में मिलने वाली प्रतिक्रियाएं  नए ढंग से  कम करने की प्रेरणा देतीं हैं ऐसा उनका मानना है । भारतीय फिल्मों की वजह से ही भारत के प्रति  जिज्ञासा    जागती है   उसी के कारण यह फिल्में देखी  और दिखायी जाती हैं वह कहती है कि यह उनके लिए कोई नई बात नही हैं १९८३ -८४ से ही उनकी फिल्मों का विशेष आयोजन बाहर के देशों में होने लगा था । इतना व्यस्त होते हुए भी कुछ नया करने की चाहत अभी तक उनेक दिल में हैं और यह चाहत उन्हें नई ऊँचाइयों तक ले जाए और हमे भी उनका काम फ़िर से देखने को मिले यही दुआ है .

वाकई शबाना आज़मी एक अदभुत व्यक्तित्व की मलिक्का हैं जिन्हें सोच कर जिनके बारे में पढ़ कर बहुत ही पोजिटिव फीलिंग का अनुभव होता है .

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