यह नही खाना वो नही खाना : World Food Day 16 October

आलू कहता मुझको खा लो,मै तुमको मोटा कर दूंगा
टमाटर कहता मुझको खा लो
मै तुम्हे लाल लाल कर दूंगा

यह कविता हमने भी बचपन में पढ़ी और अपने आने वाली पीढ़ियों को भी पढ़ा रहे. कविता के माध्यम से बच्चो को हर खाने के गुण से परिचित करवाना और जो जिस सब्ज़ी के गुण है उस से परिचित करवाना होता है. मेरे ख्याल से हर माँ अपने बच्चे को सम्पूर्ण पोष्टिक खाना खिलाना चाहती है, फिर बड़े होते होते क्या हो जाता है, कि बच्चे यह नहीं खाना वह नहीं खाना पर आ जाते हैं रूचि बदल क्यों जाती है. चॉइज किसी एक चीज की बहुत ज्यादा और कुछ बिलकुल  खाने की list से गायब हो जाती है और नतीजा खाना बचा हुआ फेंकना पड़ता है या सिर्फ उनकी पसंद का बनाना पड़ता है. आज #worldfoodday  है और मेरे ख्याल से हर किसी को हर रोज़ उस ईश्वर का धन्यवाद करना चाहिए जिसने आज रोटी खाने को दी kyunki  इस धरती में ही बहुत से लोग है जिन्हें एक वक़्त का भी खाना नसीब नहीं है.13254087_276105499393503_6999240668634728360_n

 बच्चो ने कभी भी मुझे खाने के मामले में परेशान नहीं किया ,सब कुछ खाने की आदत मैंने डाली उन्हें और साथ ही यह सिखाया की प्लेट में खाना बचा होना और फेंकना बहुत ही गन्दी आदत में होता है इसलिए उतना ही लो जितना खा सको और सब खाओ क्यों की कब क्या मिले खाने को क्या पता ,इसलिए आपको सब खाने की  आदत होनी चाहिए, पर जब मैंने अपनी tiffin सर्विस tiffin service lajpat nagar  SAMAIRA Food SERVICE (Lajpat Nagar) शुरू की तो जाना दूर दूसरे शहरों से आये बच्चे लोग जब टिफ़िन मंगवाते हैं तो उनकी पसंद साफ़ सुथरा खाना मंगवाने के सिवा जो की घर का भी बना हुआ हो और हो भी सिर्फ अपनी पसंद का, यदि उनकी पसंद का नहीं गया तो पूरा टिफ़िन वापिस आएगा और फेंका जाएगा lबहुत अजीब लगा शुरू शुरू में ,की इतनी मेहनत और इतनी महंगाई में बना खाना फेंकना बहुत” मेंटली टार्चर” सा लगता है और हर वक़्त सबकी पसंद का खाना भी नहीं बन सकता किसी को कुछ पसंद किसी को कुछ ,खैर मैंने तो खुद को किसी तरह एडजस्ट किया ,जो दे सकती हूँ वही टिफ़िन देना शुरू  किया ,और जिनके पसंद न पसंद बहुत ही अधिक थे उनका बंद कर दिया ,दुःख तो हुआ की मैंने तो “एज ऐ वर्क “यह काम शुरू किया है तो थोडा प्रोफेशनल होना चाहिए ,पर मेरे अंदर की जागरूक आत्मा जो जानती है कि खाना बनाना दिल से और इस महंगाई के जमाने में फेंकना ,जहाँ कई इंसान को एक वक़्त का खाना नसीब नहीं होता फेंकना बहुत मुश्किल है और साथ ही यह सवाल आया  कि बाहर से आये यह बच्चे जो पढने आये हैं या यहाँ काम करने वह घर का खाना मिल रहा है ,साफसुथरा के अलावा सिर्फ अपनी पसंद के खाने पर ही क्यों टिके रहना चाहते हैं ,कारण वही बचपन से सिखाया गया खाने के प्रति व्यवहार हो सकता है

अपने बच्चे को जीवन के उस आने वाले वक़्त के लिए तैयार  करे कि कोई भी कुछ भी सहज उपलब्ध नहीं है, तुम्हारे पढने जाना दूसरे शहर में उसी रोटी की जंग की एक कड़ी है और जॉब करने जाना उसी खाने को कमाने की एक भरपूर जंग और उसी से मिले खाने को सिर्फ आप इसलिए नहीं खाते क्यों कि चीज आपकी पंसद की नहीं ,सब खाने वालों के लिए अपने घर का स्वाद अपना होता है वह आपको सिर्फ अपने घर में ही मिलेगा बाहर वाला न उसको वैसा बना सकता है न वो स्वाद जो आपकी माँ के हाथ का है दे सकता है ,पर साफ़ सुथरा हो हेल्थी हो यह ध्यान में रख कर लिया जा सकता है और खाया जा सकता है ,बहुत पर्टिकुलर चीजे अपवाद हो सकती है ,पर मेरे ख्याल से वह भी लिमिट में होनी चाहिए ,जैसे करेले सभी नहीं खाते ,पर कुदरत की बनायी चीजे आपके शरीर स्वस्थ के लिए उपहार है सो अपने बच्चों को सब कुछ खाने की आदत डालें tiffin service lajpat nagar

यह लेख लिखने का ख्याल मुझे सिर्फ इसलिए नहीं आया कि  मेरी टिफ़िन सर्विस है और खाना मैं खुद बनाती हूँ और बचा हुआ खाना टिफ़िन में भी खुद ही फेंकती हूँ क्युकिं जब वो मेरे पास वापस आता है तो खराब हालत में होता है बारह घंटे के अंतराल के बाद ,यह लिखने का ख्याल इसलिए भी आया कि पिछले कुछ दिनों से अखबार और टीवी न्यूज में इंडिया में भूखे सोने वालों और भूख के मरने वालों लोगों के बारें में सुन रही हूँ, देख रही हूँ .

आज के पढ़े अखबार NAVBHART TIMES में आज १६ अक्तूबर World Food Day है और ११८ देशो में हमारा देश ९७ नम्बर पर है जहाँ लोग भूख से परेशान है .बहुत से लोग भूख से मर जाते हैं वहां आपकी थाली में बचा खाना कितना बड़ा अपराध बोध है ,जर्मनी में खांना बचाना जुर्माना देने की लिस्ट में आता है ,खाने की क़द्र करें और जो मिल रहा है साफसुथरा उसको दिल से खाए .आज आप रोटी की कद्र करेंगे कल यही रोटी आपकी भी कद्र करेगी और आपकी थाली विविध खाने के रंगों से स्वाद से सजी रहेगी



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