मैं तेनु फिर मिलांगी (Amrita PRITAM )

अमृता प्रीतम  (ਅਮ੍ਰਿਤਾ ਪ੍ਰੀਤਮ) परिचय

 

Amritā prītama एक भारतीय लेखिका और कवियित्री थी, जो पंजाबी और हिंदी में लिखती थी। उन्हें पंजाब की पहली मुख्य महिला कवियित्री भी माना जाता था और इसके साथ ही वे एक साहित्यकार और निबंधकार भी थी और पंजाबी भाषा की 20 वी सदी की प्रसिद्ध कवियित्री थी।अमृता प्रीतम को भारत – पाकिस्तान की बॉर्डर पर दोनों ही तरफ से प्यार मिला। अपने 6 दशको के करियर में उन्होंने कविताओ की 100 से ज्यादा किताबे, जीवनी, निबंध और पंजाबी फोक गीत और आत्मकथा जो बहुत चर्चित रही है” रसीदी टिकट “. उनके लेखो और उनकी कविताओ को बहुत सी भारतीय और विदेशी भाषाओ में भाषांतरित किया गया है।

 सम्मान और पुरस्कार

१९५७ में साहित्य अकादमी पुरस्कार, १९५८ में पंजाब सरकार के भाषा विभाग द्वारा पुरस्कृत, १९८८ में बल्गारिया वैरोव पुरस्कार;(अन्तर्राष्ट्रीय) और १९८२ में भारत के सर्वोच्च साहित्त्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित। उन्हें अपनी पंजाबी कविता अज्ज आखाँ वारिस शाह नूँ के लिए बहुत प्रसिद्धी प्राप्त हुई। इस कविता में भारत विभाजन के समय पंजाब में हुई भयानक घटनाओं का अत्यंत दुखद वर्णन है और यह भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में सराही गयी।  वह लेखिका और पहली पंजाबी कवियत्री मानी जाती है . कुछ समय तक उन्होंने रेडियो स्टेशन पर भी कार्य किया

लघुकथा बाय अमृता प्रीतम (the weed)

लघुकथा जंगली बूटी (the weed ) बहुत ही दिल को छु लेने वाली कहानी थी ,जिसमे औरत की इच्छा ,शिक्षा दोनों को पाप समझा जाता है . उसकी शादी उस से बहुत बड़े एक आदमी से कर दी जाती है ,अपने पिता की बात मानते हुए वह बिना किसी सवाल के इस रिश्ते को स्वीकार करती है . अंत में, जब वह युवा और सुंदर राम तारा की ओर आकर्षित होती है, तो वह उसे अपने अकेलेपन या प्रेमहीन विवाह पर दोष नहीं देती है; वह दृढ़ता से मानती है कि उसने अनजाने में खरपतवार के आकर्षण का या किसी जंगली बूटी का नशे में यह सब कर गयी है . इस कहानी में कई बातें है जो हमारे समाज के खोखलेपन को दर्शाती है, अंत में वह पढने की इच्छा जाहिर करती है ,यानी वह समाज के बनाये नियम से खुद को आज़ाद करने की बात करती है जो शादी की पुराने रीतिरिवाज़ से और समाज द्वारा स्वीकार न करने वाली औरतों पर भी सवाल जवाब है . खरपतवार (the वीड )को अमृता की सर्वश्रेष्ठ लघु कहानियों में से एक के रूप में माना जाता है और उनके अन्य लेखन की तरह, लिंग भेदभाव और महिला कामुकता के बारे में सवाल उठाती है.अमृता का लेखन अपने वक़्त से आगे का लेखन था ,जो हमेशा विवादों में रहा .लेखन के साथ उनका जीवन भी ,लिव इन में वह इमरोज़ के साथ तब रहती थी ,जब हमारा भारतीय समाज इस तरह के रिश्ते से परिचित भी नहीं था . अमृता के लेखन को आज लोग सराहते भी है और उनके लेखन के मुरीद भी हैं .

मनमर्जियां फिल्म अमृता के जीवन से साहिर , अमृता ,इमरोज़ के ट्रेंगल पर बनी फिल्म है ,जिसमे उनकी पोएम “मैं तेनु फिर मिलांगी की कुछ पंक्तियाँ ली हैं ,आप उस कविता को यहाँ यू टूयब पर भी सुन सकतें हैं .

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