माण्डू एक रूमानी अतीत से अब तक (MP)gajab hai

माण्डू एक रूमानी अतीत से अब तक

दिल्ली की सुबह जब बारिश से शुरू होती है तो न जाने क्यों मुझे ” माण्डू” बहुत याद आता है । शायद इसलिए कि वहां की बारिश बहुत ही रूमानी थी। जहाजमहल से जब सब तरफ नजर जाती है तो हरियाली ,धुंध और बारिश की खुशबू जैसे पूरे माहौल को आपके जहन में इस तरह बसा देती है कि हर बारिश में वही होने का भ्रम होता है । पर सच तो सच है कहाँ दिल्ली का शोर और कहां वह अतीत से लिपटा हुआ रूमानी माहौल।
इन्दौर से लगभग ९० किमी दूर विंध्य की पहाड़ियों में बसे हुए “माण्डू का नाम तेरहवीं शती में मालवा के सुलतानों ने “शादियाबाद “यानि “खुशियों का शहर” रख दिया था। वास्तव में यह नाम इस जगह को सार्थक करता है। यहां हरी-भरी वादियां, नर्मदा का किनारा यह सब मिलकर “माण्डू को मालवा का स्वर्ग बना देते हैं।
जहांगीर को माण्डू की रातें बेहद पसंद थीं। वह कई बार” माण्डू “आया । उसने जहाज महल को दुबारा से बनवाया ।ऐसा वहां के गाइड ने बताया। सन 1617 में जहांगीर जब माण्डू आया तो नूरजहां उसके साथ थी और उसने जलमहल में एक लड़की को जन्म दिया। यहां पर बने अशरफी महल की कहानी भी बहुत रोचक है।
माण्डू “रानी रूपमती और बाजबहादुर” के अमर प्रेम के लिए भी याद किया जाता है ।और वहां के रूमानी माहौल को देख कर लगता है कि आज भी वह प्रेम वहां मौजूद है । जहाज महल माण्डू की सबसे बड़ी पहचान है। चारों तरफ पानी से घिरे होने के कारण ऐसा लगता है जैसे हम किसी जहाज पर है । कहने को लोग मांडू को खंडहरों का गाँव भी कहते हैं परंतु इन खंडहरों के पत्थर भी बोलते हैं और सुनाते हैं हमें इतिहास की अमर कहानी । जो आज भी वहां के माहौल में गूंज रही है।।
हरियाली की खूबसूरत चादर ओढ़े हुए मांडू देशी विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष तौर पर एक सुंदर पर्यटनस्थल है। वहां जा कर उस माहौल को आज भी महसूस कर सकते है जो रहा होगा ।
जुलाई में इस जगह की सुंदरता इस क़दर आपको सम्मोहित कर लेती है कि मेरी तरह आज भी दिल्ली की बारिश में आप जहन से वहीं माण्डू घूम रहे होते है।( 4 जुलाई 2016) #माण्डूडायरी से

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