बर्फी मिठाई कैसे बनाये?

  1. बर्फ़ी नाम सोचते ही मिठाई का ही नाम याद आता है ,बाद में इस नाम पर बनी मूवी का, पर आज की इस पोस्ट में हम बर्फी मिठाई के बारे में बात करेंगे ,यह बर्फी कैसी बनती है ,कितनी तरह की होती है , आइये जानते हैं बर्फी मिठाई की मीठी बातें

भारत मिठाई का देश 

भारत में कई तरह की मिठाई बनती है , और बहुत सारी चीजों की बनती है , यह मिठाई की शुरुआत तो न जाने कैसे हुई होगी ,पर भारत में दूध से बनी कई मिठाई इस बात से सम्बन्ध जरुर दिखती है कि भारत दूध दही का देश रहा है शुरू से , तो उसी से कैसे और उपयोग किये जाएँ ,तभी मिठाई की शुरुआत हुई होगी , बर्फी भी दूध से बने खोये की मिठाई है जो भारत की एक प्रसिद्ध मिठाई है . बर्फी एक भारतीय मिठाई है जो खोये तथा चीनी से बनाया जाता है। यह कई प्रकार से बनती है ,बेसन की बर्फी ,बादाम की बर्फी , काजू की बर्फी ,पिस्ते की बर्फी ,यह शेप में चौरस होती है . और तो और कद्दू की बर्फी ,लौकी की बर्फी, गाजर की बर्फी आदि भी बनायी जाती है और शौक से खायी जाती है .भारतीय लोग जहाँ  जहाँ है वहां यह बर्फी जरुर मिलेगी .खोये ,बेसन ,की बर्फी का रेट ३०० rs के करीब होता है ,पर काजू पिस्ते की बर्फी अधिकतर ८०० rs से १००० rs तक के मूल्य में मिलती है . बाकी बर्फी भी वाजिब रेट पर  मिल जाती है .

बर्फी  का रोचक इतिहास 

बर्फी के सिलसिले में एक रोचक किस्सा है ,बर्फी अधिकतर सफ़ेद रंग की ही होती है पर हमने तिरंगे रंग की भी बर्फी देखी है यह किस्सा उसी के बारे में हैं ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरा बिल्कुल तिरंगे झंडे की तरह होती है तिरंगा  देशी मिठाई अग्रेंजी बगावत की प्रतीक है। अंग्रेजों के बैन को ठेंगा दिखाने के लिए बनारस में तिरंगा बर्फी बनाई गई थी।कई प्रयासों के बाद ऊपर केसरिया पट्टी, बीच में सफेद पट्टी, उस पर नीले रंग का चरखा तथा सबसे नीचे हरी पट्टी से तिरंगे को अंतिम स्वरूप दिया गया था। 1931 में कांग्रेस पार्टी ने तिरंगे को अपना अपना आधिकारिक झंडा स्वीकार किया। जैसे-जैसे यह झंडा लोकप्रिय होता गया अंग्रेजों की इससे चिढ़ बढ़ती ही गई।जब अंग्रेजों ने कांग्रेस के इस लोकप्रिय झंडे पर बैन लगा दिया तब राष्ट्रवाद की अलग जगाए रखने के लिए बनारस के लोगों ने तिरंगा बर्फी बनाई। भारत आजाद हुआ तब मिठाइवालों ने तिरंगा रंग की बर्फी बना दी। पूरे बनारस शहर में ये ही तिरंगा मिठाई ही बंटवाई गई। तब से लेकर आज तक तिरंगा बर्फी बनाने की परंपरा चली आ रही है। हांलाकि ज्यादातर लोगों को तिरंगा बर्फी का इतिहास नहीं पता है लेकिन यह बर्फी आज भी खूब बिकती है।

खोये की बर्फी बनाने की विधि 

आज यहाँ हम खोये की बर्फी बनाने की विधि के बारे में जानते हैं
उसके  लिए हमें चाहिए   होगी यह सामग्री है
सामग्री
खोया  250 ग्राम
चीनी- ¾ कप
पिस्ता- 1 टेबल स्पून (बारीक कतरे हुए)
इलायची- 4 से 5
घी- 1 टेबल स्पून
विधि 
खोये को क्रम्बल या कद्दूकस कर लीजिए. कढ़ाही गरम करके इसमें खोया  डालकर लगातार चलाते हुए हल्का ब्राउन भून लीजिए.भुने खोये को किसी प्लेट में निकालकर ठंडा होने के लिये रख दीजिये.
एक प्लेट या ट्रे को घी लगा कर चिकना करके रख लीजिये.
चाशनी बनाएं      कढ़ाही में चीनी और चीनी की मात्रा का 1/3 पानी यानी कि 1/4 कप पानी डालिए और चीनी में मिलाइये. चाशनी को चीनी के घुलने तक पकाएं. इसके बाद इस तरह की चाशनी बनाइये कि चाशनी प्लेट में डालते ही तुरन्त जमने लगे.(अगुली अंगूठे के बीच चिपका कर देख लीजिये, वह बहुत ही गाड़ी और तुरन्त जमने लगेगी).
चाशनी को ठंडा होने तक चालाते रहिए. जब वह जमने पर आ जाएगी, यह एकदम बूरा की तरह बन जाएगी.  इसको  हल्का गरम खोये में डालकर अच्छी तरह चमचे से चलाते हुये मिलाइये. इलाइची पाउडर भी मिला दीजिये.अब इस मिश्रण को घी लगी हुई प्लेट में डालिये, समान रूप से फैलाइये और ऊपर से कतरे पिस्ते डालकर सजाइये. इसे जमने के लिए ऎसे ही रख दीजिए. इसे जमने में 4 से 8 घंटे लग जाते हैं.
बाद में बर्फी को अपने पसंदानुसार साइज में काटकर प्लेट में रख लीजिए.

टिप्स 
अगर चीनी गंदी लगे, तो चाशनी बनाते समय इसमें 1 चमचा दूध डाल लीजिए. सारी गंदगी झाग के रूप में चाशनी के ऊपर तैरकर आ जाएगी. इसे चमचे से हटा दीजिए, क्लीयर चाशनी तैयार  हो जाएगी.
अगर आप चाशनी बनाकर बूरा ना बनाना चाहे, तो  बूरा खोये के हल्के गरम रह जाने पर मिलाकर बर्फी जमा लीजिए.
खोये  को बहुत ज्यादा ना भूनें.
गरम खोये  में बूरा न मिलाए. इससे  पिघलकर बर्फी पतली हो जाती है और 2 से 3 दिन तक नही जमती.
चाशनी बनने के बाद इसको ठंडा होने तक लगातार चमचे से चलाते रहें.बर्फी के ऊपर ,चाहे वह खोये की हो या बेसन की चांदी के वर्क लगा कर सजाये जाते हैं ,इसको कई लोग खाना पसंद करते हैं ,कई नहीं ,पर यह देखने में अच्छे लगते हैं ,जब बर्फी प्लेट में जमाई जाती है तो तभी यह वर्क लगा दिए जातें हैं ,काटते वक़्त यह बर्फी के साथ ही उसी शेप में कट जातें है , राजे महाराजे तो सोने ,चांदी सभी तरह के वर्क लगी मिठाई खाते थे ,क्यों कि यह सेहत के लिए ताकतवर समझे जाते हैं ,पर आज के मिलावटी युग में इस पर सहज विश्वास नहीं होता है

तो यह थी भारतीय मिठाई बर्फी की मीठी बातें यह कैसे बनती है इसका इतिहास क्या है ,उम्मीद है बर्फी मिठाई के बारे में इतना कुछ जानकार आपका अब इसको खाने का दिल कर आया होगा 🙂

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