आत्मकथा क्या है ? एक रोचक तथ्य

सबसे पहले तो इस विषय पर लिखने से पहले यह जानना जरूरी है कि आत्मकथा क्या है ?जिसके बारें में यह रोचक तथ्य जानना जरुरी है .

आत्मकथा कैसे कब से शुरू हुई लिखनी यह हम इस पोस्ट में जानेंगे .

आत्मकथा की परिभाषा

आत्मकथा अपने को अभिव्यक्त करने का वह माध्यम है, जिसके जरिये व्यक्ति समाज की जटिलताओं और अपने निजी संबंधों की गुत्थियों को खोलता है। आत्मकथा, चाहे वह किसी भी भाषा में लिखी गई हो वह पढना रोचक होता है . कि कोई व्यक्ति कितनी ईमानदारी और सच्चाई से अपने बारें में लिखता है .हिंदी की प्रथम आत्मकथा बनारसीदास जैन कृत अर्द्धकथानक है.

प्रसिद्ध आत्मकथा कौन कौन सी  है ?

गाँधी जी की सत्य के प्रयोग सबसे ईमानदार आत्मकथा मानी जाती है . मुझे अमृता प्रीतम की रसीदी टिकट भी एक सच्चाई से लिखी आत्मकथा लगती है ,लगती क्या यह सही में एक ईमानदार आत्मकथा है.गांधी की ‘आत्मकथा’ जो अंग्रेजी में प्रसिद्ध हुई है; उसके असली स्वरूप में तथा उसमें जो ‘दक्षिण अफ्रीका का सत्याग्रह का इतिहास’ है, इन दोनों के कुल पुष्ठ करीब एक हजार होते हैं। इन दोनों पुस्तकों के कथावस्तु को पहली बार संक्षिप्त करके इकट्ठा करके प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। क्योंकि गांधीजी की शैली ही संक्षिप्त में कहने की है इसलिए यह कार्य सरल नहीं है। एक बात और भी है कि वे सदा जितना उदेश्य पूर्ण महत्व का हो उतना ही कहते हैं। अतः उन्होंने जो भी कुछ लिखा है, उसमें काट-छाट करने से पहले दो बार सोचना ही पड़ेगा।
भारतेंदु कृत कुछ आप बीती कुछ जग बीती डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की आत्मकथा, राहुल सांकृत्यायन की मेरी जीवन गाथा के अतिरिक्त डॉ. हरिवंशराय बच्चन की आत्मकथा भी चार खण्डों में है। क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड का निर्माण फिर-फिर, बसेरे से दूर, दश द्वार से सोपान तक, प्रसिद्ध लोकप्रिय आत्मकथाएँ हैं।

वसंत से पतझर

एक मार्मिक संस्मरण जो उनके अपने अंदाज में लिखे गये थे, एक जगह पाना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है। लगता है हम प्रकारान्तर से यहाँ रवीन्द्रनाथ त्यागी की आत्मकथा का ही आस्वादन कर रहे हों, जो उनकी चिरपरिचित कटाक्ष-शैली का आनन्द भी देती है और जीवन के मार्मिक पलों को व्यंजित करने वाला जीवन-रस भी है .

पंडित नेहरुजी

उनकी आत्मकथा मेरी कहानी ( ऐन ऑटो बायोग्राफी) के बारे में सुप्रसिद्ध मनीषी सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना है कि “उनकी आत्मकथा, जिसमें आत्मकरुणा या नैतिक श्रेष्ठता को जरा भी प्रमाणित करने की चेष्टा किए बिना उनके जीवन और संघर्ष की कहानी बयान की गयी है, हमारे युग की सबसे अधिक उल्लेखनीय पुस्तकों में से एक है।”

आत्मकथा क्या है ?कुछ रोचक तथ्य

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