रॉयल ट्रेवेल विद @Orchard Tent Resort

Orchard resort pushkar

जब कोई प्रोग्राम अचानक से बने तो वह प्रोग्राम बहुत  ही दिल के करीब होता है | पिछले वीकेंड पुष्कर अजमेर का प्रोग्राम बना तो मेरी घुमक्कड़ी तबियत को जैसे सकूं मिला | पुष्कर अजमेर पहले २०१४  में जाना हुआ था पहली बार यह तब भी मनमोहक लगा था और अब दूसरी बार जाने पर भी उतना ही  आकर्षण लगा इस जगह में, यहाँ आप पहली ...

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  एक यात्रा… कहाँ है अब वह प्रकति के सब ढंग, धरती के ,पर्वत के सब उड़ गए हैं रंग.. पिछले दिनों हिसार जाना हुआ यह रास्ता मुझे वैसे भी बहुत भावुक कर देता है |रोहतक जहाँ बचपन बीता उसके साथ लगता कलानौर जहाँ जन्म लिया ..क्या वह घर अब भी वैसा होगा .कच्चा या वहां भी कुछ नया बन गया होगा ..बाग़ खेत ...

जश्न जारी है :Amrita Pritam

  ३१ तारीख इसका अमृता के जीवन पर बहुत असर रहा है .जैसे वह ३१ अगस्त को पैदा हुई ..३१ अक्तूबर को उन्होंने आखरी सांस ली ..और उनकी ही ज़िन्दगी से जुडा एक ३१ जुलाई १९३० और है .जब उनको ज़िन्दगी एक नए मुकाम पर खड़ी हुई होगी …..जिसके बारे में उन्होंने लिखा है  कोई ग्यारह बरस की थी जब एक दिन अचानक माँ ...

Sahir Ludhianvi :अफसाना प्यार का

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जब मैं अमृता के घर गई थी तो वहाँ  की हवा में जो खुशबू थी वह महक प्यार की एक एक चीज में दिखती थी इमरोज़ की खूबसूरत पेंटिंग्स ,और उस पर लिखी  अमृता की कविता की पंक्तियाँ ..देख के ही लगता है जैसे सारा माहोल वहाँ का प्यार के पावन एहसास में डूबा है ..और दिल ख़ुद बा ख़ुद जैसे रूमानी सा हो ...

चाँद और करवाचौथ : Amrita Preetam

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नजर के आसमान से सूरज कहीं दूर चला गया पर अब भी चाँद में . उसकी खुशबु आ रही है … तेरे इश्क की एक बूंद इस में मिल गई थी इस लिए  मैंने उम्र की सारी  कडवाहट  पी ली .. अमृता के कहे से : Amrita Preetam का कहना था कि दुनिया कि कोई भी किताब हो हम   उसके चिंतन का दो बूंद ...

यह नही खाना वो नही खाना : World Food Day 16 October

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आलू कहता मुझको खा लो,मै तुमको मोटा कर दूंगा टमाटर कहता मुझको खा लो मै तुम्हे लाल लाल कर दूंगा यह कविता हमने भी बचपन में पढ़ी और अपने आने वाली पीढ़ियों को भी पढ़ा रहे. कविता के माध्यम से बच्चो को हर खाने के गुण से परिचित करवाना और जो जिस सब्ज़ी के गुण है उस से परिचित करवाना होता है. मेरे ख्याल ...

पुष्कर बाजार और विदेशी रंग: Evening in Pushkar Market

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Pushkar में दूसरा दिन का सवेरा वाकई अदभुत था। इतने सारे पक्षियों का मधुर गान,आकाश में फैली उगते सूरज की लालिमा और भीगी सी  हवा दिल्ली जैसे शहर में कहाँ संभव है। टेंट के आंगन में आये तो देखा मोरनी ,कबूतर, तीतर और नील कंठ पक्षी अपनी महफ़िल जमाये बैठे थे। दिल खुश हो गया देख कर चाय की आदत ने घंटी बजवाई और” प्रभु” ...

यात्रा विद नन्हे ट्रैवेलर्स ! Travelling with kids

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Alice in Wonderland almost सबने देखा होगा। Alice एक बच्ची जो खेल से बोर हो कर एक नदी के किनारे बैठी है, तभी एक कपड़े पहने खरगोश को भागते हुए देखती है और उत्सुकता से उस खरगोश के पीछे उस के बिल से एक अदभुत दुनिया में पहुंच जाती है और कई रोचक और हैरान कर देने वाली चीजों को देखती है। उसकी इस दुनिया के ...

Mini Kolkata in Delhi: Durga Puja, CR Park

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बारिश के बाद मौसम में बदलाव आते ही हमारे देश का मूड भी फेस्टिव हो जाता है । शरदीय नवरात्रे इसकी शुरुआत ले कर आते है।पंजाबी होने के कारण तो व्रत, कंजक करते ही आ रहे है ,पर इस बार घर के इतने पास होने पर भी पहली बार दिल्ली के मिनी कलकत्ता चितरंजन पार्क जाने का मौका मिला और बंगाली Durga Puja देखने का ...